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लद्दाख के सोनम वांगचुक के जीवन पर आधारित था ‘थ्री इडियट्स’ में आमिर का किरदार

अधिकांश लोगों ने “थ्री इडियट्स” फिल्म देख रखी होगी। उस फिल्म का अजीब सा किरदार, जो आमिर खान ने निभाया था, वो भी याद होगा। अब ज्यादातर लोग जानते हैं कि रणछोड़दास चांचड़ नाम का ये किरदार कोई कपोल-कल्पित था। सच तो ये है कि ये सोनम वांगचुक नाम के एक सचमुच के आदमी पर बना किरदार है। कई बार टीवी कार्यक्रमों में आ चुके वांगचुक पढ़ाई के हिसाब से इंजिनियर हैं और कर्म के हिसाब से शिक्षक।

1988 में ये अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद लद्दाख क्षेत्र में शिक्षा सुधारों में जुट गए थे। सन 1993 से 2005 तक ये लद्दाख की इकलौती पत्रिका का संपादन भी देखते रहे। लद्दाख के पहाड़ी क्षेत्र के एनजीओ को एक साथ इकठ्ठा करके 2002 में इन्होंने लद्दाख वौलेंटरी नेटवर्क भी बना डाला था। लद्दाख हिल कौंसिल गवर्नमेंट के लद्दाख विज़न 2025 नाम के दस्तावेज को बनाने वाली समिति के भी ये प्रमुख थे। इस दस्तावेज को तब के प्रधानमंत्री एम.एम. सिंह ने 2005 में जारी किया था।

लद्दाख भी पानी की कमी से जूझता क्षेत्र है। उसके लिए भी किसी नए आविष्कार की जरूरत थी। जैसे फिल्मों वाला रणछोड़दास जुगाड़ तकनीक से अनोखे यंत्र बनाता है, कुछ वैसे ही वांगचुक ने 2013 के अंत में “बर्फ के स्तूप” का सफल परीक्षण कर डाला। इसमें ढेर सारी बर्फ इकठ्ठा कर दी जाती है और जब बसंत के अंत में गर्मी बढ़ने लगती है तो किसानों को ठीक जरूरत के वक्त इनसे पिघल कर आने वाला पानी मिलने लगता है।

महिलाओं द्वारा चलाये जाने वाले “फार्म स्टे” के जरिये उन्होंने पर्यटन को बढ़ावा दिया। लोग अब लद्दाख के खेतों पर महिलाओं द्वारा चलाये जाने वाले परिवार जैसी जगहों पर भी ठहरते हैं और वहां लोग कैसे रहते, काम करते हैं, इसका अनुभव ले सकते हैं। होटल की तरह इनके चलने से परिवार और महिलाओं को जो आय होती है, उसकी हम कोई बात नहीं कर रहे। बड़े बहुमंजिला होटल बनने से पर्यावरण पर जो असर होता, उसे इससे कितना कम किया गया होगा, हम इसपर भी कुछ नहीं कहेंगे।

ओह हां, बताते चलें कि इन्हें भी 2018 में ही मैगसेसे पुरस्कार मिला है! ये और बात है कि इनकी पहुंच में कोई टीवी चैनल नहीं था, इसलिए उसपर बधाइयों का तांता नहीं लगा।

बाकी उन्होंने लद्दाख को अपने बधाई के सन्देश में साफ़ कहा है कि अगस्त 1989 से जारी एक केंद्र शासित प्रदेश की उनके क्षेत्र की मांगों को मानने के लिए प्रधानमंत्री जी का धन्यवाद! लद्दाख की आबादी कश्मीर की तुलना में कम है, उनका सदनों में प्रतिनिधित्व भी बहुत थोड़ा रहता है। अल्पसंख्यकों की आवाज को बूटों तले रौंदे जाने से बचाने के लिए प्रधानमंत्री महोदय को मेरा भी आभार! नए केंद्र-शासित प्रदेश के निर्माण पर वांगचुक और लद्दाख के सभी मितरों को हमारी ओर से भी बधाई!!

-आनंद कुमार

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