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मां चाहे जैसी भी हो, मां ही होती है। हम कुछ भी कर लें, उससे उऋण नहीं हो सकते। क्‍योंकि उसने जान की बाजी लगाकर हमें जन्‍म दिया होता है और सालों हमारा मल-मूत्र साफ करती है। चाहे हमने जितनी बार कपड़े गंदे किये होंगे, उफ् किये बिना साफ किये होंगे।

हो सकता है कि आज वो कुछ ऐसा कहती हो कि हमें अच्‍छा न लगता हो, लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं कि हम उसे यूं ही फूट-फूट कर रोने के लिए छोड़ दें। उम्‍मीद है कि मीनाक्षी सिनेमा, रांची के अग्रवाल बंधु अपनी मां के इस हाल पर जरूर एक बार गौर करेंगे।

-एस.एस.मीडिया डेस्‍क

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