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सलमान की ‘भारत’ वर्सेज खेसारी की ‘कुली नं. 1’ : कहां राजा भोज कहां गंगू तेली भी नहीं

कहते हैं कि कंपिटीशन बराबरी के लोगों के बीच ही अच्‍छा लगता है। लेकिन भोजपुरी के कुछ ‘अत्‍यंत पढ़े-लिखे’ पीआरओज को ये बात समझ में ही नहीं आती। हालांकि ये बात दुनिया को पता है कि भोजपुरी कलाकारों और उनकी फिल्‍मों की क्‍या औकात है, फिर भी ये पीआरओज झूठी रिपोर्टिंग करते ही रहते हैं, जिससे फिल्‍म का भविष्‍य बुरी तरह प्रभावित होता है। जानते हैं, ऐसा क्‍यों करते हैं ये….बस इसलिए कि निर्माता खुश रहेगा तो उसका पॉकेट काटने में आसानी होगी और यही करते भी हैं ये।

भोजपुरी इंडस्‍ट्री के ही लोग बताते हैं कि कुछ भोजपुरी पीआरओज ने अपने प्रोड्यूसर्स को खुश करने के लिए यहां तक कि खुद के पोर्टल और यू ट्यूब चैनल बना रखे हैं, ताकि उन पर झूठी प्रशंसा वाले पोस्‍ट और वीडियो अपलोड करवा सकें। उन पीआरओज का शातिरपना तो देखिए, अपने पोर्टल के नाम भी उन्‍होंने ऐसे रख रखे हैं, जिससे आपको लगेगा कि ये तो किसी बड़े अखबार का पोर्टल है।

अब जरा इस स्‍क्रीन शॉट को देखिए। यह एक पीआरओ के फेसबुक एकाउंट से लिया गया है। इसमें खेसारी की टक्‍कर सलमान खान के साथ बतायी गयी है। इसे देखकर तो यही लगता है कि कहां राजा भोज और कहां गंगू तेली भी नहीं। खेसारी को गंगू तेली कहना दरअसल उस गंगू का भी अपमान ही कहा जायेगा।

40 लाख लेकर काम करनेवाले खेसारी की तुलना 40 करोड़ वाले सलमान खान से करना कितना हास्‍यास्‍पद लगता है, जरा सोचिए। खेसारी समेत भोजपुरी के जो तथाकथित तीन बड़े नाम हैं, उनकी औकात फिलहाल यही रह गयी है कि बिहार वितरक अब इनकी फिल्‍मों को एक पैसे भी एमजी नहीं दे रहे हैं। आप इनमें से किसी को भी लेकर फिल्‍म बना लीजिए, लागत भी नहीं निकलेगी, इतना गारंटी है। ऐसे में सलमान से खेसारी की तुलना करना भोजपुरी का मजाक उड़ाना नहीं तो और क्‍या है?

मजे की बात तो यह है कि सलमान खान अपनी साफ-सुथरी फिल्‍मों के लिए जाने जाते हैं, जबकि खेसारी की हर फिल्‍म अश्‍लील होती है, थोड़ी कम या थोड़ी ज्‍यादा। दोअर्थी संवाद और वैसे ही दोअर्थी गीतों का उनकी फिल्‍मों में होना अतिआवश्‍यक होता है। फिर इन दोनों की तुलना कैसे हो सकती है। बस इसलिए टक्‍कर दिखा दिया कि दोनों फिल्‍में ईद पर रिलीज होने जा रही हैं। अरे भाई, इतना तो देख लेते कि सलमान की वो फिल्‍म देश से लेकर विदेश तक तमाम बड़े-बड़े थियेटरों में रिलीज होगी, जबकि खेसारी की फिल्‍म को बिहार में ही सारे सिंगल थियेटर्स नसीब नहीं होंगे। कुछ भी लिखने के पहले थोड़ा उधार का दिमाग ले लिया करो।

-एस.एस.मीडिया डेस्‍क

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