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भोजपुरी इंडस्‍ट्री में घटिया गीत गाकर हीरो बनने का ख्‍वाब देखनेवाला संतोष रेणु यादव इन दिनों पानी पी-पीकर खेसारी लाल यादव को अभद्र बातें बोल रहा है और ये भी जताने की कोशिश कर रहा है कि वो लालू यादव का एकमात्र शुभचिंतक है। जानते हैं क्‍यों…।

दरअसल संतोष रेणु के बारे में जानने से पहले उसका बैकग्राउंड जान लेना बेहद जरूरी है। ये वही इंसान है, जिसने एक अर्से पहले खेसारी लाल की ओर से सुधीर सिंह को गाली दी थी और ये बताने की कोशिश की थी कि वो खेसारी का इकलौता शुभचिंतक है। ये घटना उस समय घटी थी, जब कुछ अर्से पहले नेता सुधीर सिंह और खेसारी लाल के बीच जमकर वाक् युद्ध चला था। तब संतोष रेणु यादव ने खेसारी के पक्ष में आवाज उठाकर खुद को लाइम लाइट में ला दिया था।

सूत्र बताते हैं कि संतोष रेणु एक अवसरवादी इंसान है। इसने उस समय खेसारी लाल के पक्ष में आवाज इसलिए उठायी थी ताकि खेसारी लाल और इसी बहाने लालू यादव के भी करीब आ सके। और वो अपने मकसद में किसी हद तक कामयाब भी हो गया। उसे लालू यादव से मिलने का मौका मिला कि नहीं, ये तो नहीं पता, लेकिन उसके लिए फिल्‍म बनानेवाले जरूर मिल गये।

असल में खेसारी लाल चारा घोटाले में जेल काट रहे लालू की उन दिनों जमकर चरण वंदना कर रहे थे और वो इसलिए कि यादव जाति का होने के नाते लालू यादव उन्‍हें अपनी पार्टी आरजेडी से टिकिट दे देंगे। इधर महागठबंधन के चलते बहुत कम ही सीटें लालू के हिस्‍से आयीं, सो खेसारी को बाहर का रास्‍ता दिखा दिया गया।

कहने का तात्‍पर्य ये है कि उस प्रकरण का खेसारी को तो कोई लाभ नहीं मिला। लेकिन संतोष रेणु की चाल कामयाब हो गयी। हुआ ये कि संतोष रेणु ने उन दिनों खेसारी के साथ-साथ जैसे ही लालू यादव के पक्ष में आवाज बुलंद की तो वो कुछ आरजेडी नेताओं की नजर में आ गया। सुना है कि लालू को खुश रखने के इरादे से उस बंदे ने संतोष रेणु को लेकर ‘लालटेन’ नाम से फिल्‍म बनाने का फैसला कर लिया, क्‍योंकि लालटेन ही लालू यादव का चुनाव चिह्न है।

इस बीच खेसारी लाल को जब ‘लालटेन’ बनाये जाने की खबर मिली तो वो छटपटाने लगे। उनहोंने इस बारे में कथित रूप से कई बार संतोष रेणु से बात भी की, लेकिन खेसारी स्‍क्रिप्‍ट में जिस तरह का बदलाव चाहते थे, उसके लिए संतोष रेणु तैयार नहीं हुए। बहरहाल तभी चुनाव की तारीखों की घोषणा हो गई। बेचारे खेसारी आरजेडी से टिकट पाने के इंतजार में थे, लेकिन लालू की पार्टी ने जब खेसारी लाल को घास नहीं डाली, तो वो मनोज तिवारी का दामन थाम कर भाजपा का चुनाव प्रचार करने जुट गये।  अब ये तो आप जानते ही हैं कि खिसियानी बिल्‍ली खंभा नोंचती है, सो प्रचार के दौरान खेसारी भी अपनी कुंठा निकालते रहते हैं। एक दिन के चुनाव-प्रचार में उन्‍होंने अपने कटु अनुभवों के कारण लालू यादव की खिंचाई क्‍या कर दी कि संतोष रेणु तिलमिला उठा। दुनिया जानती है कि अगर कोई लालू पर प्रहार करेगा तो लालू के बेटे तेजस्‍वी चुप नहीं रहेंगे, क्‍योंकि लालू के जेल जाने के बाद से ही तेजस्‍वी यादव खुद राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वो खेसारी को भी जवाब देने में संतोष से ज्‍यादा सक्षम थे, लेकिन तेजस्‍वी बोलते, उससे पहले संतोष रेणु जबर्दस्‍ती जंग-ए-मैदान में कूद पड़ा, ताकि लालू और उनके परिवारवालों के करीब आ सके।

भोजपुरी इंडस्‍ट्री के लोगों की मानें तो कल तक खेसारी के नाम की माला जपने वाला संतोष रेणु आज खेसारी को अपशब्‍द कह-कहकर खुद को मीडिया में हाईलाइट करने की कोशिश कर रहा है, साथ ही अपनी ‘लालटेन’ को चर्चा में भी रखना चाहता है। लेकिन जिस तरह की भाषा और जिस अंदाज में संतोष रेणु बोल रहा है उससे साफ पता चलता है कि वो खेसारी से भी गया-गुजरा है। बस खेसारी के नाम का फायदा उठाकर खुद को चर्चित करना चाह रहा है।

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