वितरक ऐसे तोड़ सकते हैं दिनेश, पवन और खेसारी की किलेबंदी को- सत्यकाम आनंद

 

दिनेश लाल निरहुआ ने पटना में डिस्‍ट्रीब्‍यूशन ऑफिस खोलकर बिहार के डिस्‍ट्रीब्‍यूटर्स को खासा झटका दे दिया है। वितरकों को नहीं समझ में आ रहा कि ऐसी स्‍थिति में वो क्‍या करें, क्‍योंकि निरहुआ ने ईद पर रिलीज हो रही अपनी ‘बॉर्डर’ को बिना किसी शर्त के एक्‍जीहिबिटर्स को देने की तैयारी कर ली है। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रिया हो रही है।

‘गैंग्‍स ऑफ वासेपुर’, ‘मशान’, ‘शॉर्ट्स’, ‘एनएच’8 रोड टू निधिवन’ जैसी फिल्‍मों में काम कर चुके जानेमाने अभिनेता सत्‍य काम आनंद ने इस मुद्दे पर बड़ी सधी हुई प्रक्रिया दी है, जरा आप भी देखिए-‘’अब वो वक्‍त आ गया है, जब बिहार के वितरकों को एकजुट हो जाना चाहिए और उन्‍हें नये नये कलाकारों, नये तरह के सिनेमा, चाहे वो छोटे बजट को हो या बड़े बजट का, जिसका हीरो सब्‍जेक्‍ट हो, डिस्‍ट्रीब्‍यूट करने के लिए आगे आना चाहिए। इससे उन्‍हें एक तो बड़ा घाटा नहीं उठाना पड़ेगा, दूसरे नये कलाकारों और नये निर्माताओं के हौंसले बुलंद होंगे। मर रही भोजपुरी इंडस्‍ट्री को खुली हवा में सांस लेने का मौका मिलेगा। निरहुआ, पवन और खेसारी जैसों का वो किला धराशायी होगा, जो इन लोगों ने अश्‍लील फिल्‍में कर करके तैयार किया है। वितरकों के लिए बहुत जरूरी है कि वो इनके स्‍टारडम को तोड़ें, इनके समानांतर एक नयी टीम खड़ी कर इन्‍हें इनकी औकात का एहसास करायें। इसी बहाने भोजपुरी फिल्‍मों को उसका खोया सम्‍मान मिलेगा, एक तरह से जीवनदान मिल जायेगा और इंडस्‍ट्री को विकास की एक दिशा भी प्राप्‍त होगी।

छोटे बजट की सामाजिक, पारिवारिक साफ-सुथरी फिल्‍मों को अहमियत दें, ताकि लोग सपरिवार फिल्‍म देखने आयें। अब तक जो फिल्‍में बनायी जा रही हैं, उनसे वो दर्शक कोसों दूर चले गये हैं, जो अपने परिवार के साथ फिल्‍में देखना पसंद करते हैं। इस तरह के लोगों के थिएटर तक आने से सिनेमा को दर्शक अधिक मिलने लगेंगे। सबसे बड़ी बात तो ये कि इससे उन लोगों को जबर्दस्‍त नुकसान होगा, जो अश्‍लील फिल्‍मों का निर्माण और वितरण करेंगे। और ये जरा भी मुश्‍किल काम नहीं है। बस जरूरत है तो विश्‍वास करने की। और अब वो स्‍थिति आ भी रही है, जब उनके पास विश्‍वास करने के सिवा कोई चारा नहीं होगा।‘’

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