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मां-बेटे के संबंधों पर बनी लेखक-गीतकार और निर्देशक राजेश कुमार की फिल्‍म ‘लाल’ को सेंसर बोर्ड ने पास कर दिया है। कल्‍पना शाह और संजीव सनेहिया की प्रमुश भूमिकाओं वाली इस फिल्‍म को सेंसर ने ‘यू ए’ सर्टिफिकेट दिया है और ये इस साफ-सुथरी होने का सबूत है। वर्ना भोजपुरी में 99 फीसदी फिल्‍में ‘ए’ सर्टिफिकेट के साथ ही पास होती हैं।

निर्मात्री नीता कुमारी और सह-निर्माता जितेंद्र कुमार की राजेश कुमार के निर्देशन में बनी इस पूर्णत: पारिवारिक फिल्‍म में संजीव सनेहिया, कल्‍पना शाह, श्रुति राव, रूपा सिंह, गिरीश शर्मा, जितेंद्र वत्‍स, उदय श्रीवास्‍तव, साहब लालधारी आदि की प्रमुख भूमिकाएं हैं।

जज्‍बातों से लबरेज इस फिल्‍म के गीत-संगीत बेहद कर्णप्रिय हैं। फिल्‍म के निर्देशक राजेश कुमार की नजर में मां और मातृभाषा दोनों का स्‍थान और सम्‍मान एक ही है। वो कहते हैं, ‘‘मैं किसी भी हाल में अपनी मातृभाषा के सम्मान पर आंच नहीं आने देना चाहता। मैंने अपनी आगामी फिल्‍मों का निर्माण इस इरादे से किया है कि सभी मां, बहन, बेटियां बेहिचक थियेटर में आयें और फिल्‍म देखें।’’

ये पूछने पर कि क्‍या मां-बहन-बेटियां उनकी फिल्‍मों के साफ-सुथरी होने पर यकीन कर पायेंगी….जवाब में वो कहते हैं, ‘‘देखिए, इसका सबसे बड़ा प्रमाण है फिल्‍म को ‘यू ए’ सर्टिफिकेट का मिलना। इसके अलावा मैंने पोस्‍टर्स भी इस तरह के बनवाये हैं कि उन्‍हें देखने के बाद हमारी बहन-बेटियों को लेगे कि ‘अरे ये तो पहले जैसी साफ-सुथरी भोजपुरी फिल्‍मों के पोस्‍टर्स लग रहे हैं।’’

आज के युग में इस तरह की बेहद साफ-सुथरी फिल्मों के निर्माण का सारा श्रेय अपने प्रोड्यूसर्स को देते हुए राजेश कुमार कहते हैं कि आज ये आप जो कुछ भी देख रहे हैं, वो हमारे निर्माताओं की वजह से ही संभव हो पाया है। उन लोगों का सबसे बड़ा योगदान रहा है।

अपने निर्माताओं के प्रति आभार व्‍यक्‍त करते हुए राजेश कुमार आगे कहते हैं, ‘‘हमारी फिल्‍मों के सभी निर्माताओं ने मुझे पर विश्‍वास किया, ये मेरे लिए सबसे बड़ी बात है। सच कहूं तो स्‍वच्‍छ फिल्‍मों का निर्माण कर हमने अपनी मातृभाषा के माथे पर लगे कलंक को धोने का प्रयास किया है। अब गेंद दर्शकों के पाले में है।’’  

-एस.एस. मीडिया डेस्‍क

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