‘लल्लू की लैला’ का ट्रेलर रिलीज : घिसी-पिटी लैला के लल्‍लू किसी एंगल से लल्‍लू नहीं लगे


बड़ा शोर सुनते थे पहलू में दिल का, जो चीरा तो कतरा ये खूं भी न निकला…कुछ ऐसा ही अनुभव हुआ निर्माता रत्‍नाकर कुमार की सुशील कुमार उपाध्‍याय निर्देशित फिल्‍म ‘लल्‍लू की लैला’ का ट्रेलर देखकर। दिनेश लाल यादव, आम्रपाली दूबे, यामिनी सिंह, कनक पांडेय, सुशील सिंह, संजय पांडेय, आदि अभिनीत इस फिल्‍म के ट्रेलर से तो यही लगा कि गोविंदा की हिंदी फिल्‍मों से प्रेरित होकर बनाया गया है और दिनेश लाल के दिमाग में गोविंदा बसे थे। लेकिन ट्रेलर में जहां कहीं भी वो कॉमेडी सीन करते नजर आते हैं, कहीं भी हंसी नहीं आती। केवल मोदी टाइप जैकेट पहनकर गोविंदा को कॉपी करने से कुछ नहीं होनेवाला। कम से कम इतना तो पता होना ही चाहिए कि गोविंदा की टाइमिंग कमाल की थी, और कॉमेडी के लिए टाइमिंग कितना मायने रखती है, ये बताने की कोई आवश्‍यकता नहीं।

डंका पीटा जा रहा था कि ‘लल्‍लू की लैला’ एकदम साफ-सुथरी फिल्‍म है, लेकिन ट्रेलर देखकर यही लगा कि फिल्‍म में कई ऐसे दृश्‍य देखने को मिल सकते हैं, जहां सपरिवार थियेटर जानेवाले दर्शकों को थोड़ी झेंप महसूस करनी पड़ सकती है। बेशक भोजपुरी फिल्‍मों में अब तक जो अश्‍लीलता का घटिया स्‍तर था, वैसा इसमें नहीं दिखाया गया है। लेकिन ये भी नहीं कहा जा सकता कि एकदम साफ-सुथरी ही है।

भोजपुरी के डांस डायरेक्‍टरों को तो भगा देना चाहिए। हीरोइन के पीछे तबला यही बजवा सकते हैं… ये जब तक हीरो को हीरोइन के उत्‍तर प्रदेश से लेकर मध्‍य प्रदेश तक चूमते नहीं दिखा लेते, इनको चैन ही नहीं मिलता। फिलहाल भोजपुरी इंडस्‍ट्री के लिए बहुत जरूरी है कि नये गीतकारों और नृत्‍य निर्देशकों को मौका दिया जाये। ये ‘दीया बुतानेवाले’ डायरेक्‍टर क्‍या डांस डायरेक्‍शन करेंगे और जब भी करेंगे तो पोर्नवाला ही करेंगे। सेंसुअस गीत का निर्देशन इन सबके बस की बात नहीं है।

सुशील सिंह एक अलग तरह के किरदार में नजर आये। अब जहां निरहुआ हो, सुशील सिंह हों, वहां देव सिंह न हों, ये भला कहां संभव है। कुल मिलाकर ‘लल्‍लू की लैला’ भी एक आम भोजपुरी फिल्‍मों की तरह ही साबित होनेवाली है। नयापन कुछ नहीं है। लल्‍लू को कम से कम वैसे परिधान तो देने चाहिए थे। अरे हां, लल्‍लू को काला टीका लगाया गया है, कभी ललाट की बायें ओर तो कभी दायीं ओर। गीत-संगीत भी लल्‍लू छाप वाला ही है, कहीं कोई खास नयापन नजर नहीं आया, जो दर्शकों में एक नया आकर्षण पैदा कर सके।