April 14, 2021

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‘रामरंग’ स्‍टूडियो की स्‍थापना की आवश्‍यकता क्‍यों पड़ी?

भोजपुरी सिनेमा, गीत-संगीत में व्या्प्त अश्लीलता ने सारे भोजपुरी समाज में त्राहि-त्राहि मचा रखी है। हर जिले-जवार के गली-नुक्कड़ पर खुले छोटे-मोटे हजारों की संख्या में रिकॉर्डिंग स्टूडियोज अश्लीलता की जमकर आपूर्ति कर रहे हैं, क्योंकि अश्लीलता उन स्टूडियोज की खुराक बन गयी है। उसके बिना वो जिंदा नहीं रह सकते। हर जिले में शायद ही स्टूडियोज होंगे, जहां से अश्लीलता को बढ़ावा नहीं मिलता होगा।

मिर्जापुर के घंटाघर में स्थित रामरंग स्टूडियो उपरोक्त स्टूडियो से एकदम अलग है, क्योंकि रामरंग की सोच ही उन स्टू्डियोज से अलग है। रामरंग के कर्ताधर्ता संगीतकार प्रकाश राय के अलावा अर्थशास्त्र के शिक्षक कृष्णगोपाल गुप्ता, सैनिक कॉलेज करनाल के शिक्षक अभिनव पांडेय इस स्टूडियो को सरस्वती मंदिर समझते हैं और इन्हें सहयोग मिल गया पिछले 10 वर्षों से भोजपुरी में अश्लीलता की लड़ाई लड़ने वाले स्टारडस्ट के पूर्व संपादक धनंजय सिंह का और बस एक उम्मीद की किरण जगी और और परिणामस्वरूप रामरंग स्टूडियो की स्थापना हुई।  स्टूडियो सरस गीतों के माध्यम से सुरों के मंदिर की पवित्रता को बरकरार रखने का पूरा प्रयास करेगा। जाहिर है कि मंदिर के अंदर कोई भी गंदा काम नहीं होने दिया जायेगा। गीत-संगीत की पवित्रता को बचाकर रखने की हर संभव कोशिश की जायेगी। रामरंग का नारा ही है कि वो अपनी छत के नीचे से कोई भी सस्‍ता किस्‍म का गीत नहीं निकलने देगा।

रामरंग को भरोसा है कि जितने भी साफ-सुथरा एवं स्वस्थ- गीत गाने के हिमायती गायक होंगे, वो सभी रामरंग से जुड़ कर अश्लीलता के खिलाफ चल रही लड़ाई को मजबूत करेंगे। आज के डिजिटल युग में श्लील गीत लाकर ही अश्लीलता को कमजोर किया जा सकता है, वो भी अत्यधिक मात्रा में। और उसके लिए एक अच्‍छा स्‍टूडियो का होना आवश्‍यक है और रामरंग फाइव प्‍वाइंट वन स्‍टूडियो है।