‘राजा राजकुमार’ का चोली और ढोंढ़ी छाप ट्रेलर हो गया रिलीज


निर्माता सुभाष यादव और राजीव रंजन कश्‍यप की एच. एस. पवन के निर्देशन में बनी रितेश पांडेय और अक्षरा सिंह की जोड़ी वाली फिल्‍म ‘राजा राजकुमार’ का ट्रेलर रिलीज हुआ है। ट्रेलर देखकर ये कतई नहीं लगा कि इसमें कुछ नयापन है। आमतौर से भोजपुरी फिल्‍मों में जो होता है, वही इसमें भी देखने को मिला। थोड़ा रोमांस, ढेर सारा सस्‍ता एक्‍शन और तीन चार गंदे शब्‍दों वाले गीत। बस बन गयी भोजपुरी फिल्‍म।

इस फिल्‍म के हीरो रितेश पांडेय के चेहरे का एक्‍सप्रेशन देख लीजिए। सामान्‍य सींस हों या एक्‍शन, हर जगह चेहरे का भाव एक जैसा ही है। इन एलबम छाप हीरोज से भोजपुरी इंडस्‍ट्री का कभी उद्धार नहीं होनेवाला। हां, पूरे ट्रेलर में चुलबुली लड़की के रोल में अक्षरा सिंह ठीकठाक लगी हैं। संजय पांडेय हमेशा बोर करते हैं, यहां भी उन्‍होंने बोर ही किया है।  

रहा सवाल गीत-संगीत का तो वही घिसा-पिटा। जानते हैं, इस फिल्‍म में कुल 5 गीत लेखक हैं मनोज मतलबी, प्‍यारे लाल यादव, जिन्‍हें कवि लिखना कवि का अपमान लगता है, विभाकर पांडेय, सुमित चंद्रवंशी सिंह और बिमलेश उपाध्‍याय।  लगता है कि प्रसाद स्‍वरूप एक एक गीत बांट दिया गया है सबको। सारे गीतों में बस एक ही आखिर वाला गीत थोड़ा ठीक है, बाकी सभी अश्‍लील हैं। चोली से लेकर ढोंढ़ी में खोदने तक की बात कही गयी है गीतों में। ऐसे गीत सुनकर उल्‍टी हो सकती है। न जाने किस कमीने ने ढोंढ़ी में खोदने की बात लिखी है। पहले से ही शर्मसार भोजपुरी का इससे बड़ा दुर्भाग्‍य और क्‍या हो सकता है कि अभी भी ऐसे बेशर्मों से इस तरह के भौंडे गीत लिखवाये जा रहे हैं। बाकी हीरो-हीरोइन तो यहां गंदगी के टोकरे हैं ही। यू ट्यूब देख लीजिए, इनकी भोजपुरी सड़ांध की गंध नथूनों में भर जायेगी।

मजे की बात तो यह है कि पिछले तीन-चार सालों से एक भी फिल्‍म सुपरहिट नहीं हुई है, जबकि सबमें भरपूर गंदगी डाली गयी थी, बावजूद इसके निर्माता-निर्देशकों की आंखों से अश्‍लीलता के लालच की पट्टी नहीं उतर रही है। यकीनन जिस दिन भोजपुरी फिल्‍मों में काम करनेवाले सभी लोग अपनी फिल्‍म अपनी बहन-बेटियों के साथ थियेटर में बैठकर फिल्‍म देखने लग जायेंगे, उस दिन से भोजपुरी के अच्‍छे दिन वापस आ जायेंगे।