मुन्‍ना बजरंगी के पोस्‍टमॉर्टम में एक भी गोली नहीं मिली उसके शरीर में

कल यूपी के माफिया मुन्‍ना बजरंगी की बागपत जेल में गोली मारकर की गयी हत्‍या के बाद जो पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट आयी है उसमें मुन्‍ना बजरंगी के शरीर में एक भी गोली नहीं मिली, जबकि उनको 10 गोलियां मारी गयी थीं और उन गोलियों के खोखे मौका ए वारदाता मिले थे।
पोस्‍टमॉर्टम करते वक्‍त इस माफिया के पेट में एक गोली जरूर मिली, लेकिन वह सालों पुरानी थी। बाकी गोलियां इसलिए नहीं मिलीं, क्‍योंकि हत्‍यारे ने गोली इतना नजदीक से मारी थी कि वे शरीर के पार चली गयी थीं।
तीन डॉक्‍टरों के पैनल द्वारा किये गये पोस्‍टमॉर्टम में जो गोली मिली थी, वह 20 साल पहले उसे एक एनकाउं टर के दौरान मारी गयी थी। दरअसल 1998 में मुन्‍ना बजरंगी का करनाल के हाइवे पर पुलिस से मुठभेड़ हो गयी थी। उस मुठभेड़ में उसे कुल 8 गोलियां लगी थीं। तब पुलिस ने उसे मृत मानकर अस्‍पताल न ले जाकर सीधे मोर्चरी ले गयी थी। वहां जाने के बाद पता चला कि अभी भी उसकी सांसें चल रही हैं।
फिर उसे अस्‍पताल ले जाया गया। अस्‍पताल में डॉक्‍टरों ने ऑपरेशन कर सात गोलियां तो निकाल दी थीं, लेकिन पेट में जो गोली फंसी थी, उसे नहीं निकाला, क्‍योंकि उसे निकालने में उसकी जान को खतरा था।

 

कहते हैं, बाद में मुन्‍ना बजरंगी ने बाद में खुद भी उस गोली को निकलवाने की कोशिश नहीं की, क्‍योंकि उसे डॉक्‍टर से मिलीभगत कर ऑपरेशन के बहाने हत्‍या कराये जाने का डर बना रहता था।
मुन्‍ना बजरंगी उत्‍तर प्रदेश के जौनपुर जिले का रहनेवाला था। उसने केवल प्राइमरी तक ही पढ़ाई की थी। फिर एक भठ्ठे पर ट्रैक्‍टर चलाने लगा था। बाद में उसे जब ट्रैक्‍टर चलाना रास नहीं आया तो कालीन बुनने का कामा करने लग गया था।
मुन्‍ना बजरंगी पहली बार पुलिस की नजर में तब आया था, जब 1984 में उसने रामपुर थाना क्षेत्र के कालीन व्‍यवसायी को लूट के इरादे से गोली मार दी थी। यहीं से उसका अपराध की दुनिया में प्रवेश हुआ। बाद में उसके तारे जौनपुर के ही विनोद सिंह नाटे से जुड़ गये।
फिर तो उसने कई हत्‍यायें की। भाजपा नेता रामचंदर सिंह समेत तीन लोगों की हत्‍या तो उसने जिला जेल के सामने कर दी थी और वहां मौजूद पुलिसवाले की कारबाइन लूटकर भाग गया था।
मुन्‍ना बजरंगी अपराध जगत में अक्‍सर दिलदहलाऊ घटनाओं को अंजाम देता रहा। हालांकि पुलिस पीछे लगी रही, लेकिन बार-बार वह चकमा देकर भाग निकलने में सफल हो जाता था।
बहरहाल 1985 में जब डॉन मुखतार अंसारी के इशारे पर विधायक कृष्‍णानंद राय सहित सात लोगों की गाजीपुर में हत्‍या कर दी गयी तो सीबीआई ने मुन्‍ना बजरंगी पर 12 लाख का इनाम घोषित कर दिया था। उत्‍तर प्रदेश,हरियाणा, महाराष्‍ट्र, मध्‍य प्रदेश से लेकर बिहार तक मुन्‍ना बजरंगी का साम्राज्‍य फैला था।
मुन्‍ना बजरंगी भले ही एक कुख्‍यात अपराधी था, लेकिन जेल के अंदर उसकी हत्‍या पूरे प्रशासन की ईमानदारी पर प्रश्‍नचिह्न खड़ा करता है। हालांकि जेलर समेत चार लोगों को सस्‍पेंड कर दिया गया है और वारदात की जांच के आदेश दे दिये गये हैं। लेकिन सवाल अपनी जगह अभी भी कायम है कि आखिर जेलों में बार-बार इस तरह की हत्‍याएं क्‍यों होती रहती हैं….

 

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