मीडिया में सिसक-सिसक कर रोनेवाले मनोज तिवारी को निर्देशक नितिन नीर चंद्रा ने दिया सटीक जवाब


भोजपुरी फिल्‍म अभिनेता से नेता बने मनोज तिवारी हाल ही में दिये एक इंटरव्‍यू में जब सिसक सिसक रोये तो सोशल मीडिया में जबर्दस्‍त प्रतिक्रिया देखने को मिली। ‘देसवा’ जैसी बेहतरीन भोजपुरी फिल्‍म देनेवाले लेखक-निर्देशक नितिन नीर चंद्रा ने भी अपनेे अंदाज में मनोज तिवारी को जवाब दिया। उन्‍होंने अपने फेसबुक एकाउंट से जो जवाब दिया, वही हूबहू नीचे दिया जा रहा है- 

आपको रोते हुए देखाl बुरा नहीं लगाl क्योंकि जब एक दशक से आप भोजपुरी की इज़्ज़त लूटते और लुटवाते रहे, तब आपकी आंख में पानी नहीं आया तो अब ये घड़ियाली आंसू पे क्यूं किसी को बुरा लगे भला? आप ये मत समझिए कि आपको सपा या भाजपा ने इसलिए टिकट दिया] क्योंकि आप कोई बहुत बड़े कलाकार या संस्कृतिकर्मी हैं। आप कीचड़ में खिले कमल नहीं, बुरा मत मानिएगा, लेकिन आप कीचड़ में उछलते मेंढक हैंl आप को लोगों ने क्यों चुना? कोई ग़लतफ़हमी मत पालिए, सुनिए आप और रवि किशन क्यों चुने गए।

आपने और आपके मेढकों ने एक बहुत बड़े, कम पढ़े-लिखे ग़रीबों और वंचित वर्ग को अश्लील फूहड़ संगीत सिनेमा को सस्ते में बेच-बेच कर के एक ऐसा बाज़ार खड़ा कर दिया, जो आगे जाकर आप जैसे लोगों को ही आदर्श मानने लगा।  दूसरी तरफ़ पढ़ा लिखा सम्भ्रांत वर्ग हिंदी का ग़ुलाम हो गयाl वरना आपके ही सुपरस्टार के बच्चे भोजपुरी इंडस्ट्री में काम नहीं कर रहे, जैसा कि आपने कुछ दिनों पहले देखा।

अब जब भाजपा आई तो उसने सिर्फ़ वोट पाने के लिए हर ऐसे व्यक्ति को टिकट देना शुरू कर दिया, जो किसी भी वर्ग में पॉपुलर होl पूरी भोजपुरी इंडस्ट्री घुस गयी भाजपा में।  क्रिकेटर से लेकर टिक टोक स्टार तक को भी भाजपा टिकट देने लगी। क्योंकि भाजपा को सीट चाहिए थी और कांग्रेस से परेशान लोग मोदी में उम्मीद खोजने लगे थे। वरना आप ना तो भोजपुरी को उठा पाए, ना अपने ज़िला, गांव और राज्य को ही। आपने अपने साथ दूसरे अश्लीलों को भी शामिल किया जैसे रवि दिनेश पवन, सारे लोग भाजपा में।  तो आप समझ लीजिए कि आप जैसे लोगों ने भोजपुरी को घसीटते हुए शमशान ले जाकर गाड़ दिया। आपकी मातृभाषा भोजपुरी की इज़्ज़त लुटती रही और आप नपुंसक बने स्‍वार्थपूर्ण मौन धारण किए रहे। सच तो यह है कि जो आदमी अपनी मातृभाषा का बलात्कार करवाता रहे और बलात्कार करने वाले को संसद और विधानसभा में भेजे, उस जैसे लोगों को तो डूब मरना चाहिए।

रही बात गरीबी की तो ग़रीबी सबने देखी है। दिल्ली में मैं भी ट्यूशन पढ़ाकर फ़ीस और घर का किराया देता था l आप तो बीएचयू में थे, भरत शर्मा व्यास और भिखारी ठाकुर से ज़्यादा ग़रीब थे आप? 15 साल पहले आपके पास मर्सिडीज़ थी, याद है ना? आप जैसे लोगों को तो जीवन से संन्यास ले लेना चाहिए। आप कलाकार ना थे ना होंगे।  ईश्वर करे कि आपको आपकी करनी का फल मिलता रहे।  एक दिन ये शोषित वर्ग भी आपकी सच्चाई जान जाएगा।

धन्यवाद।