भोजपुरी फिल्मों में अश्लीलों की अब खैर नहीं : मुंबई, बिहार, उत्‍तर प्रदेश और झारखंड में दायर होंगी याचिकाएं


फिल्म इंडस्ट्री के भीतर अश्लीलता के खिलाफ क्रांति का बिगुल बज़ गया है! 5 लाख सदस्योंवाली फेडरेशन ऑफ़ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लाइज ने एलान किया है कि भोजपुरी फिल्मों में अब अश्लीलता नहीं बर्दास्त की जाएगी। अश्‍लील फिल्मों का बनना, सेंसर होना और उनका प्रदर्शन किया जाना सब रोका जाएगा। फेडरेशन ने अपने सदस्यों को आगाह किया है कि अश्लील फिल्मों का बनना सामजिक अपराध है। इसलिए कोई उनके निर्माण या प्रदर्शन में संलग्न न हो। जो लोग ऐसा नहीं करेंगे, उनकी सदस्यता रद्द कर दी जाएगी। फेडरेशन ने इस बात की भी घोषणा की है कि मुंबई, इलाहाबाद, पटना और रांची हाई कोर्ट में पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान द्वारा भोजपुरी मनोरंजन उद्योग में फ़ैली अश्लीलता के खिलाफ दायर की जा रही याचिका में फेडरेशन भी सह-याचिकाकर्ता बनेगा।

1 जनवरी के बाद कानूनी कार्रवाई शुरू

पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान और फेडरेशन ऑफ़ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लाइज ने यह घोषणा अंधेरी के कार्तिक काम्प्लेक्स में सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन के दफ्तर में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में की। दोनों संगठनों ने इस बात का भी एलान किया है कि 1 जनवरी 2019 से रिलीज़ होनेवाली हर भोजपुरी फिल्म की पूर्वांचल के समाज और संस्कृति को जाननेवाले किसी विद्वान व्यक्ति से समीक्षा कराई जाएगी, और पूर्वांचल के समाज के मानदंडों के हिसाब से यदि कुछ गलत पाया गया तो सेंसर बोर्ड के सामने यह सवाल प्रखरता से उठाया जाएगा कि उसने इस फिल्म को कैसे पास किया?

प्रेस कांफ्रेंस को फेडरेशन के अध्यक्ष श्री बी एन तिवारी , महासचिव श्री अशोक दुबे, कोषाध्यक्ष श्री संजू श्रीवास्तव, प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के सदस्य श्री शरद देवराम शेलार और पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान की ओर से पूर्व मंत्री श्री चंद्रकांत त्रिपाठी, अश्लीलता विरोधी अभियान की ब्रांड एम्बेसडर पद्मश्री डॉ. शोमा घोष, प्रतिष्ठान के सचिव श्री ओम प्रकाश, मुंबई हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर रहे एडवोकेट श्री विजय सिंह और गायक श्री अविनाश तिवारी ने सम्बोधित किया। प्रेस वार्ता को सम्बोधित कर रहे सभी लोगों का मानना था कि भोजपुरी मनोरंजन उद्योग में अश्लीलता इन दिनों चरम पर है। यह महिलाओं की अस्मिता पर हमला है। इससे बच्चों, किशोरों, तरुणों का भविष्य बिगड़ रहा है। समाज की छवि बिगड़ रही है। और भाषा, साहित्य, संस्कृति और समाज सबकी अवमानना हो रही है।

भोजपुरी फिल्मों और गीत संगीत में व्याप्त अश्लीलता के खिलाफ मुंबई में आज प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गयी…

Posted by Dhananjai Singh on Thursday, November 15, 2018

भोजपुरी में अश्‍लीलता बंद तो बंद – बी एन तिवारी

इन परिस्‍थितियों को रेखांकित करते हुए श्री तिवारी ने कहा- “ बंद यानी बंद। भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में अश्लीलता अब नहीं चलेगी। और सेंसर बोर्ड ने भी नियमों का पालन नहीं किया तो हम उसके खिलाफ भी मुखर विरोध के लिए तैयार हैं। ” उन्होंने कहा कि पहले भोजपुरी की यह लड़ाई जीत ली जाए, इसके बाद हिंदी सिनेमा में भी अश्लीलता का विरोध किया जाएगा। पहले सबसे ज्यादा बुराई जहां है, उसे ख़त्म कर लिया जाए।

अश्‍लीलता के खिलाफ अब संगठित लड़ाई होगी – शोमा घोष

डॉ. शोमा घोष ने कहा-“ बहुत मीठी बोली है भोजपुरी, बहुत संपन्न संस्कृति की, बहुत विस्तृत फलक की। चंद तिजारती लोग उसे बिगाड़ रहे हैं। ” उन्होंने कहा कि यह लड़ाई तो मां के दूध की मिठास बचाने की लड़ाई है। समाज के होने और जीने की लड़ाई है। समाज ने अब तक संगठित विरोध नहीं किया था, इसलिए यह बुराई फैलती चली गयी।

श्री त्रिपाठी ने कहा कि हम सभी इस लड़ाई को एक तार्किक अंजाम तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। श्री दुबे, श्री श्रीवास्तव और श्री शेलार ने भी यही प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने बताया कि “फेडरेशन अश्लीलता के खिलाफ अपनी इस प्रतिबद्धता को सभी सदस्यों को सूचित कर रही है, और चारों निर्माता संगठनों से भी इस बारे बात की जा रही है। हमें विश्वास है कि इस लड़ाई में सभी साथ खड़े होंगे और सबकी इस बारे में एक व्यापक सहमति बनेगी।” उन्होंने बताया कि सेंसर बोर्ड को भी इस बारे में फेडरेशन की इस प्रतिबद्धता की जानकारी दी जा रही है। इस बाबत फेडरेशन के सलाहकार जाने-माने निर्देशक श्री अशोक पंडित से भी बात हो रही है।

अश्‍लीलता के खिलाफ कई याचिकाएं दर्ज होंगी – ओम प्रकाश  

प्रतिष्ठान के सचिव श्री ओम प्रकाश ने विभिन्न हाई कोर्ट में फाइल की जा रही याचिका का विवरण देते हुए कहा कि धारा 21 में दिए गए जीने के हक़ के मौलिक अधिकार को विचार का मुख्य बिंदु बनाया जा रहा है। इस मामले में यह याचिका एक अनोखी याचिका भी बनेगी। सवाल यह भी है कि भाषा को, साहित्य को, संस्कृति को, लोक कलाओं को, मर्यादाओं को, मूल्यों को, मानकों को भी जीने का, सम्मान से जीने का कोई हक़ है कि नहीं? उन्होंने कहा कि यही याचिका उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखण्ड के राज्य मानवाधिकार आयोग में भी दाखिल की जा रही है। उन्होंने कहा कि निर्माताओं, निर्देशकों, प्रदर्शकों, वितरकों , कलाकारों आदि को मिलाकर कुल 600 लोगों को व्यक्तिगत चिट्ठी भेज कर भी उनसे आग्रह किया गया है कि वे भोजपुरी फिल्मों में अश्लीलता का कारण न बनें।

ओम प्रकाश
सचिव , पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान
९०२९२८६६६१