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भोजपुरी इंडस्‍ट्री नहीं, दगे हुए सुपरस्‍टारों की सत्‍ता अब खतरे में है

भोजपुरी फिल्मों में कब किसके दिन फिर जाएं, कोई नहीं जानता। तमाशा खुद देख लीजिए, थियेटर में आकर भोजपुरी फिल्में देखने में दर्शकों का रुझान बहुत कम और डिजिटल दुनिया में अत्‍यधिक लगाव होने का असर ये हुआ है कि प्रोड्यूसर्स ने उन सुपरस्‍टारों की ओर से मुंह मोड़ना शुरू कर दिया है, जो एक फिल्‍म का 40 से 50 लाख रुपये लेते हैं और अपनी ही लैला को हीरोइन बनाने को मजबूर करते हैं।

कई प्रोड्यूसर्स तो अपना साइनिंग एमाउंट तक उनसे वापस मांग रहे हैं और एमाउंट वापस न मिल पाने के कारण सुपरस्टारों और प्रोड्यूसर्स में खिचखिच भी हो रही है। उधर डिजिटल मार्केट ठीकठाक होने के कारण सेकेंड रो के उन स्टारों की चांदी हो गयी है, जिनके पास प्रोड्यूसर ना के बराबर जाते थे। आज चिंटू, यश मिश्रा, राकेश मिश्रा, आदित्य ओझा, प्रमोद प्रेमी, रितेश पांडे, गौरव झा, अरविंद अकेला कल्लू, गोलू, हलचल अजित सहित कई नए गायकों की चांदी हो गयी है। इनके पास आज की डेट में डेट मिलना मुश्किल हो रहा है। हर प्रोड्यूसर इन्हें अपनी फिल्मों के लिए साइन कर रहा है।

हीरोइनों में भी पुरानी हीरोइनों की जगह लोग चांदनी सिंह, पूनम दुबे, रीतू सिंह आदि को साइन कर रहे हैं। सबका मकसद साफ है कि बजट के अंदर फ़िल्म बनाएं। इसलिए जिन लोगों को लग रहा है कि भोजपुरी इंडस्ट्री खतरे में है, तो बता दूं कि भोजपुरी इंडस्ट्री नहीं, बल्‍कि दगे हुए सुपरस्टारों की सत्ता खतरे में है।

-शशिकांत सिंह

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