बतौर निर्देशक मेरा संघर्ष भी अपने आप में एक कहानी है- अभिषेक तिवारी


किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए संघर्ष एक बुनियादी पड़ाव है। आप बिना संघर्ष के कुछ भी हासिल नहीं कर सकते। बतौर निर्देशक मेरा संघर्ष भी एक कहानी है, लेकिन उसका कोई औचित्य तब तक नहीं बनता जब तक मैं बतौर निर्देशक कुछ सार्थक काम ना कर लूं।

पिछले मई माह में हमारे मित्र ने हमसे कहा कि आपको एक वेब सीरीज का निर्देशन करना है, हमने सोचा कि क्या पता, क्या है यह वेब सीरीज! लेकिन उन्होंने कहा कि यह अब तक आ रही तमाम वेब सीरीज से हटकर है और पारिवारिक पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिर हमने हां कर दिया। परिणाम आज सबके सामने है।

सच कहूं तो कम बजट में सम्पूर्ण लगन के साथ एक बड़े ग्रुप के लिए सौ एपिसोड का धारावाहिक करना अपने आप में एक गौरव की बात है। आज जी टीवी ग्रुप के साथ जुड़कर ‘सोहर’ चैनल के लिए शुरुआती दौर में काम करना हमें बहुत कुछ सिखा गया। आप छोटी टीम के साथ भी लगन से काम करें तो बेहतर परिणाम दे सकते हैं।

आज बज्जिका भाषा में ‘सीतामढ़ी की मैना’ का दूसरा एपिसोड आया है। इसके अलावा इसी ‘सोहर’ चैनल के लिए हमारी मातृभाषा भोजपुरी में बन रही ‘आरा की मास्टरनी जी’ भी इसी हफ़्ते वेबकास्ट के लिए तैयार है।

‘सीतामढ़ी की मैना’ का निर्देशन करते-करते ही मुझे ‘आरा की मास्टरनी जी’ के बारे में सूचित किया गया। बात चूंकि मेरी अपनी मातृभाषा की थी, कुछ सार्थक करने की चाहत थी, सो हमने इस धारावाहिक को अपना समय देना सुनिश्चित किया। नतीजा, आप सभी के आशीर्वाद से बस चंद दिनों के अंदर ही आपके सम्मुख ‘आरा की मास्टरनी जी’ भी प्रस्तुत होंगी। तब तक आप सभी ‘सीतामढ़ी की मैना’ को आशीष रूपी स्नेह देते रहें।