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भोजपुरी इंडस्‍ट्री अगर डूब रही है तो इसके लिए कोई और नहीं, बल्‍कि खुद भोजपुरी के मेकर्स ही इसके लिए जिम्‍मेदार हैं। डायरेक्‍टर चंदन उपाध्‍याय की एक फिल्‍म का टीजर रिलीज हुआ है, जिसका शीर्षक है ‘बब्‍बर’। निर्माता विजय कुमार गुप्‍ता की इस फिल्‍म में हीरो अरविंद अकेला कल्‍लू हैं। तनुश्री, मोहिनी घोष, विजय कुमार गुप्‍ता, संजय पांडेय आदि अन्‍य प्रमुख कलाकार हैं।  

किसी भी कहानी के लिए किरदारों का चयन बड़ा मायने रखता है। इस फिल्‍म का टीजर रिलीज होते ही इंडस्‍ट्री के एक वितरक ने पहली प्रतिक्रया यही दी- वाह, क्‍या कास्‍टिंग है…फिल्‍म का नाम ‘बब्‍बर’ और हीरो कल्‍लू। क्‍या समझकर कास्‍टिंग की गयी है। अगर कलाकार का चयन सही है तो शीर्षक सही नहीं है और यदि शीर्षक सही है तो कलाकार सही नहीं।

पोस्‍टर देखकर भी हंसी ही आती है। ना जाने क्‍या सोचकर ये लोग इस तरह की हास्‍यास्‍पद चीजें बनाते हैं। इससे लोगों में आकर्षण पैदा होने की बजाय आकर्षण जाता है। इतना जान लीजिए कि दर्शक अब पहले जैसे बेवकूफ नहीं रह गये हैं।

टीजर ही देख लीजिए, गोली मारते वक्‍त भी कल्‍लू की भावभंगिमा ऐसी लगती है, मानो कोई रोमांटिक गीत गानेवाला है। वही बॉलीवुड और साउथ की खिचड़ी लगती है फिल्‍म। संजय पांडेय का अंदाज तो ऐसा लगता है, जैसे फ्रेम टू फ्रेम किसी साउथ के विलेन को कॉपी किया गया है।

एक और बहुत बड़ी समस्‍या देखने को ये मिल रही है और वो ये कि भोजपुरी फिल्‍में कहने को ही भोजपुरी रह गयी हैं। ज्‍यादातर संवाद हिंदी में ही होते हैं, जो भोजपुरी के भविष्‍य के लिए सही नहीं है।

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