प्रमोद प्रेमी के खिलाफ घरेलू हिंसा को महिमामंडित करने का केस किया जाना चाहिए


भयंकर बर्बादी के दौर से गुजर रही भोजपुरी इंडस्‍ट्री में एक गायक आया है। उसने किसी छुटभैये गायक की धुन मारकर एक गीत गाया है, जिसका शीर्षक ‘दोगलवा’ से शुरू होता है। अश्‍लीलता की सारी हदें तोड़कर इंडस्‍ट्री में आया वो गायक आज नायक बन गया है और लोग उसे प्रमोद प्रेमी नाम से जानते हैं। उसके इस ‘दोगलवा छाप’ गीत को किसी बेदर्दी ने लिखा है। वैसे देखा जाये तो इस स्‍तर के गीतकारों से अच्‍छे की आप उम्‍मीद भी नहीं कर सकते। जो मातृभाषा के प्रति बेदर्दी होगा, वो इसी तरह के कॉन्‍सेप्‍ट पर और ऐसे ही शब्‍दों में गीत लिख सकता है।

दुख और अफसोस की बात ये है कि पूरा गीत घरेलू हिंसा पर लिखा गया है, जिसमें एक नालायक-चरित्रहीन पति अपनी पत्‍नी को बर्बरता के साथ पीटता रहता है और वो अपने मायके जाकर अपनी मां से अपने उस घटिया पति की शिकायत करती है। इस पूरे कॉन्‍सेप्‍ट पर जिस तरह से इस गीत को इसके डायरेक्‍टर ने पिक्‍चराइज किया है, वो कानूनन अपराध है। उसने घरेलू हिंसा को जिस तरह से महिमामंडित किया है, उससे समाज में एक गलत संदेश जाता है। उसे नहीं पता कि मोदी सरकार में ‘बेटी पिटवाओ’ का नहीं, ‘बेटी बचाओ’ का नारा बुलंद किया गया है। चूंकि उस घटिया गाने को उसी टाइप के दर्शकों का एक बड़ा वर्ग देख चुका है, इसलिए हम नहीं चाहते कि उसका लिंक देकर उसके उस सस्‍ते गाने को और प्रमोट किया जाये।

हां यहां, वो लिंक जरूर दिया जा रहा है, जिसमें एक गायक उस ‘दोगलवा गीत’ के गायक को कोस रहा है…