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पुलवामा में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवानों की शहादत के बाद समूचा देश आहत है। कई जगहों पर बाजार बंद हैं। लोगों के दिलो दिमाग पर मातम छाया हुआ है, लेकिन सिनेमाघर के मालिक अभी भी सिनेमा दिखा रहे हैं।

देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्‍य ये है कि लोगों में वेलेंटाइन डे वाला प्रेम तो ऊफान मार रहा है, लेकिन देशप्रेम का भाव तुलनात्‍मक दृष्‍टि से बहुत कम देखने को मिल रहा है। जरा सोचिए उन जवानों के बारे में, जिनका शरीर तक पहचान में नहीं आ रहा था। उनकी घड़ी, उनके वायलेट, उनके कार्ड्स के आधार पर उनकी पहचान की गयी है, लेकिन भोजपुरी इंडस्‍ट्री को इससे कुछ लेना-देना नहीं है। निर्माता शूटिंग कर रहे हैं, कलाकार नाच रहे हैं और कुत्‍ते गायक गीत गाकर श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

जिस दिन हमला हुआ, उस दिन शाम को मनोज तिवारी और रवि किशन इलाहाबाद में नाच रहे थे तो खेसारी लाल शूटिंग में व्‍यस्‍त थे। बात अगर एक्‍जीहिबिटर्स की करें तो वो भी थियेटरों में फिल्‍म दिखा रहे हैं। जरा सोचिए कि आपका फिल्‍म दिखाना क्‍या उन शहीदों की शहादत का एक तरह से अपमान नहीं है…?

सच कहें तो देश के सारे एक्‍जीहिबिटर्स का चाहिए कि आतंकी हमले में वीरगति को प्राप्‍त जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए वो सांकेतिक तौर पर कम से कम एक दिन तो अपने सिनेमाघर बंद रखें। इससे दुश्‍मनों को एक संदेश जायेगा कि अपने जवानों की शहादत को देश के लोगों ने कितनी गंभीरता से लिया है। उम्‍मीद है कि देश के सभी एक्‍जीहिबिटर्स इस बात पर एक बार गौर जरूर करेंगे और एक दिन अपने थियेटरों को बंद कर देश के प्रति अपने प्रेम के साथ ही जवानों की शहादत को नमन करेंगे।

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