Menu
0 Comments

भोजपुरी की डूबती नैया को उबारना है तो बूढ़े घोड़ों पर दांव लगाना बंद करना होगा, क्‍योंकि एक तो भोजपुरी इंडस्‍ट्री को खंदक में इन्होंने ही गिराया है, दूसरे अब इनमें वो आकर्षण नहीं है कि इनकी फिल्‍म देखने के लिए लोग टिकट खरीदकर थियेटर में जायेंगे। ये सभी यू ट्यूब स्‍टार बनकर रह गये हैं।

इन बूढ़े घोड़ों के साथ रेस में दौड़नेवाली जो फिक्‍स मोहतरमाएं हैं, वो अब शक्‍ल सूरत से अम्‍मा बन चुकी हैं। उनके पास न तो सूरत है और न ही सीरत रह गयी है। इसलिए हे नये-पुराने निर्माताओ, नये युवाओं को मैदान में उतारो। रिस्‍क ही खेलना है तो उन पर खेलो, जिनमें संभावनाएं हैं।अरे जुआ ही खेलना है तो घाघरा-चोली और ढोंढ़ी में उलझे तथा राते दिया बुताके, पलंगिया पर चोंय-चोंय, पोंय-पोंय करने वाले गीत चोरों, निर्माताओं को लूटने की मंशा रखनेवालों और भोजपुरी का सत्‍यानाश करनेवालों को दरकिनार कर नयी प्रतिभाओं की तलाश कर उन पर दांव लगाओ। वहां कुछ बेहतर होगा तो बात बन जायेगी। भोजपुरी को नयी दिशा मिल जायेगी और दशा भी बेहतर हो जायेगी।
माना कि अब कुछ ट्रेड के पंडितों ने भोजपुरी की नैया पार करने का बीड़ा उठाया है, लेकिन अफसोस ये है कि उन लोगों ने भी इसके लिए उन घटिया कलाकारों के ही कंधे का सहारा लिया है, जिनका पोस्‍टर देखकर ही भोजपुरी दर्शक घिना जाते हैं।
जरा देखिए, एक वितरक महोदय उस पवन सिंह को लेकर साफ-सुथरी फिल्‍म बनाने का दावा कर रहे हैं, जिसकी एक फिल्‍म का ट्रेलर हाल ही में रिलीज हुआ है और वो इतना गंदा है कि सेंसर बोर्ड खुद कानूनी पचड़े में फंस सकता है। अब बताइये, ऐसे सस्‍ते कलाकारों की फिल्‍म चाहे जितनी भी साफ हो, किसी को सपरिवार जाने की हिम्‍मत होगी…कभी नहीं।

एक और फिल्‍म कुछ वितरक व निर्माता महोदय लोग मिलकर बना रहे हैं और उसमें हीरो पांडे जी का बेटा है। वही, जो चिपक कर चुम्‍मा लेता है। जो सारे भोजपुरी जगत में जातिवाद का जहर बोता है। अब बताइये, कोई भी सभ्‍य व्‍यक्‍ति उसकी फिल्‍म को देखने सपरिवार जाना चाहेगा थियेटर में…
हो सकता है कि अपने संबंधों और अनुभव को इस्‍तेमाल कर या गुणा-गणित बिठाकर ये वितरक इन फिल्‍मों को बनाकर आर्थिक दृष्‍टि से कुछ कमा लें, लेकिन इससे भोजपुरी इंडस्‍ट्री का भला कभी नहीं होगा।वैसे भी इन बुढ़ा चले कलाकारों पर कोई कितने दिनों तक सवारी कर सकता है। खुद सोचिए, आज अगर भारतीय क्रिकेट टीम विश्‍व की टॉप टीमों में से है तो इसलिए कि उसमें लगातार नये घोड़े दौड़ाये जा रहे हैं। वहीं बूढ़े रहते तो अब तक कब्र में चली गयी होती।

-एस.एस. मीडिया डेस्‍क

 

Tags: , , ,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!