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पटना में आयोजित ‘रंग बरसे’ कार्यक्रम में इंदू सोनाली का हो रहा है जमकर विरोध

भोजपुरी फिल्‍म इंडस्‍ट्री कितने बुरे दौर से गुजर रही है, ये किसी से छुपा नहीं है। ये भी सभी को पता है कि भोजपुरी को सबसे अधिक नुकसान अश्‍लीलता ने ही पहुंचाया है। और अश्‍लीलता फैलाने का काम इंडस्‍ट्री के ही नामीगिरामी लोगों ने किया है। यही कारण है कि भोजपुरीभाषियों का एक बड़ा तबका अश्‍लीलता के साथ-साथ अश्‍लील गायक-गायिकाओं और नायक-नायिकाओं का खुलकर विरोध कर रहा है।

अब तो यहां तक कि अश्‍लीलता के कोढ़ को काबू करने के लिए कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी गयी है। लेकिन इन सारी चीजों के बीच सबसे दुखद बात ये है कि भोजपुरी के तमाम अश्‍लील गायकों और नायकों को राजनैतिक लोगों की छत्रछाया प्राप्‍त है।

अब देखिए, 16 मार्च 2019 को पटना के भारतीय नृत्‍य कलामंदिर में ‘रंग बरसे’ कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में मुख्‍य अतिथि बिहार के राज्‍यपाल श्री लालजी टंडन हैं और गायक कलाकारों के तौर पर भरत शर्मा व्‍यास और मनोज तिवारी के साथ इंदू सोनाली को बुलाया गया है। जाहिर है, ऐसे मंच पर इंदू सोनाली को बुलाया जाना भोजपुरी प्रेमियों को खलेगा ही।

अगर खलता नहीं तो लोग सोशल मीडिया पर इंदू सोनाली का विरोध क्‍यों करते? अच्‍छी बात ये है कि यह विरोध धीरे-धीरे मुखर हो रहा है। भोजपुरी के मानिंद फिल्म मेकर नितीन नीर चंद्रा ने तो आज सोशल मीडिया में सोनाली के बुलाये जाने पर खुलकर विरोध जताया है और लोगों से भी कहा है कि वो विरोध करें। इसके लिए उनके पोस्‍ट को शेयर करें। नितिन नीर चंद्रा का विरोध जायज है और लोगों को भी चाहिए कि वो इंदू सोनाली का विरोध जमकर करें। आखिर जिन लोगों ने भोजपुरी को पोर्न की स्‍थिति में पहुंचाया है, उनको सम्‍मानित मंच पर क्‍यों आने दिया जाना चाहिए?  

गौरतलब है कि इंदू सोनाली उन अश्‍लील गायिकाओं में से एक हैं, जिन्‍होंने नाम-दाम कमाने के लिए भोजपुरी की प्रतिष्‍ठा को माटी में मिला दिया है। उनके कारनामे अगर आपको जानना है तो यू ट्यूब पर बस उनका नाम टाइप कर दीजिए। सारी हकीकत सामने आ जायेगी। तकरीबन हर कुख्‍यात अश्‍लील गीत में महिला आवाज के तौर पर उनका नाम सामने आ जायेगा।

सूत्रों का कहना है कि इसके लिए मनोज तिवारी काफी हद तक जिम्‍मेदार हैं। सच कहा जाये तो मनोज तिवारी अश्‍लील कलाकारों और राजनीतिक जगत के बीच की वो धुरी हैं, जिस पर घूमते हुए वो बारी-बारी से पवन सिंह, खेसारी लाल यादव, इंदू सोनाली आदि जैसे अश्‍लील गायक-गायिकाओं को बड़े-बड़े मंच दिलाने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे सभी लोगों का विरोध होना ही चाहिए। अपने पांच साल के कार्यकाल में भोजपुरी की बेहतरी के लिए एक भी काम नहीं किया है मनोज तिवारी ने। चुनाव में इसका भी हिसाब होना चाहिए।

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