निरहुआ की ‘बॉर्डर’: कहने को देशभक्ति वाली फिल्म है और गीत इतना गंदा

दिनेश लाल यादव के बारे में कहा जाता है कि वो भोजपुरी के आज के तीन बड़े नामों में से इकलौते हैं, जो पढ़े-लिखे हैं। लेकिन उनकी मानसिकता भी कितनी निचले स्‍तर पर चली गयी है, ‘बॉर्डर’ के इस गीत ‘बेटउवा तोहार गोर होर्इ हो…’के जरिए आप समझ सकते हैं।

अब ये तो सभी को पता है कि भोजपुरी इंडस्‍ट्री में पवन, खेसारी और निरहुआ में कंपिटीशन चलता है। चूंकि पवन की ‘वांटेड’ और खेसारी की ‘दुलहिन गंगा पार के’ अपेक्षाकृत अच्‍छी चल रही हैं, इसलिए निरहुआ पर ये प्रेशर आ गया है कि अगर उसकी ‘बॉर्डर’ नहीं चली तो उसका एक हीरो के तौर पर मार्केट धराशायी हो जायेगा। और ये लाजिमी है भी।

सूत्रों की मानें तो दिनेश के लिए अब ये नाक का सवाल बन गया है कि उनकी ‘बॉर्डर’ हिट हो। तभी तो वो ईद पर रिलीज होने जा रही अपनी इस फिल्‍म को हिट कराने के लिए साम-दाम-दंड-भेद की सारी नीतियां अपना रहे हैं।

दिनेश ने इस क्रम में सबसे पहले खुद का वितरण ऑफिस खोला, फिर पवन सिंह की ‘मां तुझे सलाम’ की रिलीज को टलवाया, उसके बाद बिहार के सुदूर गांवों में फिल्‍म का प्रचार करने के लिए 7 गाडि़या बुक करवायीं और फिर अलग-अलग जिलों में वहां की लोकल टीम और यूनिट के लोगों के बीच क्रिकेट मैच के आयोजन का फैसला किया। यहां तक तो सब ठीक था, लेकिन अब जो उन्‍होंने अश्‍लीलता वाला दांव चला है, वह बेहद निंदनीय है।

वैसे फिल्‍म के इस गीत को न ही सुनें तो ही बेहतर है, क्‍योंकि सुनने में खराब लगता है। दरअसल, घटिया मानसिकता वाले किसी लेखक ने इस गीत को एकदम ही गंदे थीम पर लिखा है। सबसे अफसोस की बात तो यह है कि वे सभी ‘बॉर्डर’ को देशभक्‍ति वाली फिल्‍म कहकर प्रचारित कर रहे हैं और देशभक्‍ति के नाम इस तरह का भौंडापन भी परोस रहे हैं, जो राष्‍ट्रभक्‍ति के नाम पर मजाक है मजाक।

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