नए लोगों को लेकर ऐसे भोजपुरी फिल्‍म बनाना मील का पत्‍थर साबित हो सकता है


भोजपुरी फ़िल्म इंडस्ट्री के लिए यह समय बहुत ही महत्वपूर्ण है । यदि इस समय बड़े निर्माता मीडियम क्लास के या फ्रेशर लड़कों ( दक्ष अभिनेता ) के साथ नए प्रोजेक्ट करते हैं तो यह प्रयोग भविष्य के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

फॉर्मूले ये रहे-

अभिनेता भले ही नया हो, लेकिन अभिनय की कसौटी पर खरा उतरनेवाला हो, भले ही उसके लिए एक लंबा और सार्थक ऑडिशन कंडक्ट क्‍यों न कराना पड़े।

बात संगीत की करें तो बड़े, अनुभवी लोगों के साथ मिलकर क्लासिकल, फोक भोजपुरी को फ़िल्म में सीक्वेंस के साथ मिक्स किया जाए। कोई भी अनसिचुएशनल गीत फ़िल्म में ना डाला जाए। आइटम सॉन्ग डालना कोई मजबूरी नहीं हो।

कहानी ऐसी हो, जो हमारे गांव, परिवेश, परिवार, यूथ, शिक्षित समाज आदि सभी को एकसाथ सूट करे। इसके लिए कहानियों का एक संग्रह तैयार किया जाए, नए लेखकों से थीम लिए जाएं, फिर उसे पटकथा विशेषज्ञों से डेवलप कराया जाए। जरूरी हो, तो स्टोरी बोर्डिंग भी की जाए, इससे मेकिंग के समय आसानी होगी।

कलाकारों में आपका मुख्य कलाकार भले ही नया हो, लेकिन बाकी के सपोर्टिंग कलाकारों में आप अनुभव को तरज़ीह दे सकते हैं। इससे ये होगा कि नया कलाकार सहज होकर काम करेगा और उससे कम गलतियां होंगी, और जहां गलती होगी, अनुभवी सहयोगी उसकी भरपाई कर सकेंगे।

जहां तक लोकेशन का सवाल है तो कोशिश यही हो कि फ़िल्म कहानी के मूल को मिस ना करे, इसके लिए यथासम्भव उस कहानी से सम्बंधित लोकेशन बिहार/ झारखंड/ उत्तर प्रदेश/ उत्तराखंड का लोकेशन ही इस्तेमाल हो। इन राज्यों में गांव के साथ अच्छे शहर भी हैं। और हां, परमिशन के साथ शूटिंग करने पर सरकारी सहयोग भी मिलता है। यह मेरा निजी अनुभव रहा है।

टेक्निकल सहयोगी- आप कभी भी डीओपी/ कैमरा अटेंडेंट, लाइटमैन, स्पॉट बॉय, मेकअप मैन, ड्रेस मैन को नजरअंदाज ना करें। ऐसे लोगों का चयन करते वक्‍त अनुभवी लोगों को अहमियत दी जानी चाहिए। हां यदि बजट की कमी है तो हर विभाग में एक अनुभवी रखकर बाकी फ्रेशर रखकर काम निकाला जा सकता है।

अब जब आप इतना सबकुछ ध्यान देकर करेंगे तो एक आधा ढंग का पीआरओ भी रख लीजिए, जो आपकी फ़िल्म/ फ़िल्म मेकिंग की प्रयोगात्मक छवि को बाहर अच्छे से कैश कराने में बेहतर सहयोगी साबित हो।

अगर इन सुझावों को मानकर कोई मेकर फ़िल्म बनाएगा तो यकीन मानिए, कभी भी कोई फेल नहीं होगा। मेरा अनुभव कहता है कि ढंग से काम करने वालों के लिए ईश्वर भी सहायक की भूमिका अदा करते हैं।

नोट – मैं भी फ़िल्म लाइन का ही एक कम किंतु सटीक अनुभवी कलाकार/ तकनीशियन हूं। अतः मेरी राय को कमतर नहीं आंका जा सकता है।

अभिषेक तिवारी
आरा, भोजपुर बिहार से।

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