‘दुलहिन वही जो पिया मन भाये’ का ट्रेलर रिलीज : पिया को ही नहीं, दर्शकों को भी भानी चाहिए

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बिहार से एक लड़का  अपने दोस्‍त के पास लंदन जाता है और वहां जाकर लिट्टी चोखा बेचता है। वहीं पर उसे एक अप्रवासी भारतीय लड़की से प्‍यार हो जाता है। लड़की के घर वाले दोनों की शादी करने को तैयार हो जाते हैं, लेकिन लड़का अपने माता-पिता से शादी की इजाजत लेने भारत आता है और यहां उसकी शादी एक दूसरी लड़की से कर दी जाती है। पति के रूप में उस लड़के को वह लड़की बेइंतहां प्‍यार करती है। यानी हीरो एक हीरोइन दो और दोनों से बेइंतहां प्‍यार। अब हीरो अंत में किसको मिलेगा, यही इस फिल्‍म का सस्‍पेंस है। वैसे देखा जाये तो आमतौर से अंत में हीरो को उसकी पत्‍नी ही मिलती है और प्रेमिका अपने प्‍यार को कुर्बान कर देती है। काफी हद तक इसी की संभावना भी है।

बहरहाल, यह कोई काल्‍पनिक कहानी का प्‍लॉट नहीं, बल्‍कि याशी फिल्‍म्‍स की जल्‍दी ही रिलीज होनेवाली फिल्‍म ‘दुलहिन वही जो पिया मन भाये’ की कहानी है, जिसका ट्रेलर आज ही रिलीज हुआ है। खेसारी लाल, काजल राघवानी और मधु शर्मा आदि इसके प्रमुख कलाकार हैं। कहानी 95 फीसदी खुल चुकी है। यही तो भोजपुरी फिल्‍मों के ट्रेलर की खासियत है। जब तक कहानी खोल नहीं देते, ट्रेलर बनता ही नहीं है।

फिल्‍म में कम से कम 6 या 7 गीत रखने की इंडस्‍ट्री ने भीष्‍म प्रतिज्ञा कर रखी है। उसमें भी दो तीन गीत तो ऐसे होंगे ही, जिसमें आपको शर्माने, लजाने, हिचकिचाने का पूरा मौका देते है। इस फिल्‍म के ट्रेलर में भी जवनिया को झुलुआ झुलाया गया है, सड़िया खोला गया है। अरे साहब, फिल्‍म का सिर्फ नाम साफ-सुथरा रखने से कुछ नहीं होता। एकदम साफ-सुथरी फिल्‍म बनाने के लिए नीयत साफ-सुथरी होनी चाहिए। एक भी गाना कर्णप्रिय नहीं बना है। सभी के सभी चलताऊ लगते हैं। गुलरी क फुलवा बहुत पुरानी बात हो चुकी है।

ये भी तो सोचिए कि दर्शकों को लंदन की लोकेशंस ही देखना होगा तो बॉलीवुड की तमाम फिल्‍में बन चुकी हैं, लोग देख भी चुके हैं और देख भी लेंगे। कम से कम आप तो वैसा नहीं ही दिखा सकते। भोजपुरी को भोजपुरी पृष्‍ठभूमि में ही बनाइये तो ज्‍यादा बेहतरह होगा। लंदन घूमना-घुमाना हो तो चले जाइये, घूम आइये, लोगों को घुमा आइये। सैर-सपाटा भी कर लीजिए। सिर्फ लंदन में लिट्टी चोखा बेचते दिखा देने से भोजपुरी की दशा-दिशा में कुछ परिवर्तन नहीं होनेवाला है। और हां, यदि लंदन को ही आप दिखाना चाहते हैं तो कुछ नया कॉनसेप्‍ट सोचिए। नये तरीके से दिखाइये। घिसे-पिटे प्‍लॉट को और कब तक घिसते रहेंगे।

खेसारी की एक्‍टिंग और कॉमेडी भी अब टाइप्‍ड हो चुकी है। उनसे अलग करवाने के लिए डायरेक्‍टर को मेहनत करनी होगी। हीरोइनों में मधु का काम अच्‍छा लग रहा है। काजल के गेट-अप के बारे में कुछ और सोचना चाहिए था। रजनीश के डायरेक्‍शन में बनी इस फिल्‍म पर ‘मेहंदी लगा के रखना’ की छाप साफ पता चल रही है। बहरहाल, फिल्‍म के भविष्‍य को लेकर अंतिम फैसला तो दर्शकों के ही हाथ में है, जो फिलहाल थियेटरों से विमुख हो चुके हैं।

सच कहें तो भोजपुरी इंडस्‍ट्री को इस समय किसी ऐसी फिल्‍म की जरूरत है, जिसका कॉनसेप्‍ट लोगों में जबर्दस्‍त जिज्ञासा जगाये और उन्‍हें थियेटरों तक आने को मजबूर कर दे। घिसे-पिटे विषयों पर बनने वाली फिल्‍मों में पवन, खेसारी, निरहुआ और उनकी पसंदीदा चंद हीरोइनों को बहुत देख चुके लोग, और कितना दिखायेंगे। बड़े मेकर वही होते हैं, जो केवल स्‍टारों के साथ काम ही नहीं करते, बल्‍कि नये स्‍टारों को जन्‍म देते हैं।

 

 

 

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