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दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले देश चीन ने कभी बढ़ती आबादी सबसे बड़ी समस्या थी और वहां 1979 से जनसंख्या नियंत्रण के लिए दशकों तक ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ लागू कर रखी थी| लेकिन 2016 में चीन ने बुजुर्ग आबादी और कम होते वर्कफोर्स को देखते हुए दो बच्चों की अनुमति दे दी थी| पर इससे भी चीन की समस्या का समाधान नहीं हो सका है|

यूएस आधारित एकेडमी यी फुक्सियान के मुताबिक, 2018 में चीन में जन्म दर में प्रति वर्ष 25 लाख की गिरावट हुई है| चीन के शहरी और ग्रामीण आबादी का अध्ययन करने वाले यी ने कहा, पिछला साल चीन की आबादी के लिए एक ऐतिहासिक टर्निंग पॉइंट रहा| यी ने आगाह किया कि घटती आबादी के इस ट्रेंड को अब शायद बदला ना जा सके| ऐसा इसलिए कि यहां बच्चा पैदा करने के लिए उपयुक्त उम्र की महिलाओं की संख्या में कमी आई है| दूसरी तरफ  शिक्षा, स्वास्थ्य और घर पर बढ़ते खर्च की वजह से लोग खुद भी ज्यादा बच्चे नहीं पैदा करना चाहते हैं|

यी ने एक महत्वपूर्ण बात यह भी कही है कि चीन दुनिया भर की इंडस्ट्रीज को सस्ता लेबर उपलब्ध कराने में सक्षम था, लेकिन अब चीन में श्रमिक आबादी घटती जा रही है, तो जाहिर सी बात है कि अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ेगा और अगर यही स्थिति रही, तो अमेरिका की अर्थव्यवस्था को चीन नहीं, बल्कि भारत पीछे छोड़ेगा जिसके पास ज्यादा युवा आबादी है|

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