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फिल्‍म इंडस्‍ट्री का हाल बड़ा अजीब है। अगर स्‍थिति ऐसी ही रही तो सारे सिंगल स्‍क्रीन वाले सिनेमाघर बंद होते चले जायेंगे और ये फिल्‍म इंडस्‍ट्री के हक में कदापि ठीक नहीं होगा। हम यहां ये बात रजनीकांत और अक्षय कुमार अभिनीत ‘2.0’ को लेकर करने जा रहे हैं, लेकिन उससे पहले एक नजर ‘ठग्‍स ऑफ हिंदुस्‍तान’ पर डालनी जरूरी है।

अमिताभ बच्‍चन और आमिर खान जैसे दिग्गज सितारों से सजी इस फिल्‍म का क्‍या हश्र हुआ है और इसकी नाकामी का सिंगल स्‍क्रीन वालों पर क्‍या असर पड़ा है, ये किसी से छुपा नहीं है। तमाम सिनेमाघरों को इस फिल्‍म के चक्‍कर में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। कुछ तो बंद होने की कगार पर पहुंच गये हैं।

उत्‍तरी बिहार के एक सिनेमाघर का मालिक कहता है कि उसने 7 लाख दिये थे ‘ठग्‍स ऑफ हिंदुस्‍तान’ के लिए, लेकिन धंधा बहुत मुश्‍किल से चार लाख का ही हो पाया। वो कहता है कि उसकी गाढ़ी कमाई के तीन लाख एक झटके में डूब गये। इसकी भरपाई कैसे होगी, फिलहाल इसका जवाब उसके पास नहीं है। उसे अब केवल यश राज बैनर से ही उम्‍मीद रह गयी है। उत्‍तरी बिहार के कमोबेश सभी थियेटरों के मालिकों का हाल उस थियेटर वाले की ही तरह है, जिसने यह उम्‍मीद लगा रखी है कि शायद यश राज फिल्‍म्‍स उनके पैसे लौटा दे। सिनेमाघर के मालिक कहते हैं कि अगर ऐसा नहीं होता है, वो बर्बाद हो जायेंगे।

अब आइये हम बात करते हैं ‘2.0’ के हिंदी वर्शन की, जिसे ऑल इंडिया रिलीज करने का अधिकार अनिल थाडानी ने लिया है और उन्‍होंने इसके लिए 80 करोड़ बतौर एडवांस कमिशन दिये हैं। जानते हैं, इसके एवज में क्‍या हो रहा है? मल्‍टीप्‍लेक्‍सेस के सामने कोई भी शर्त न रख पाने वाली वितरण कंपनी अब सिंगल स्‍क्रीन थियेटर के मालिकों पर सितम ढाा रही है।

असल में जो लोग पटना में बैठकर बिहार-झारखंड का वितरण देख रहे हैं, वो वहां के सिंगल स्‍क्रीन थियेटर्स के मालिकों पर अधिक पैसे उगाहने के लिए जबर्दस्‍त दबाव बनाये हुए हैं।

लेकिन खबरों की मानें तो ‘ठग्‍स ऑफ हिंदुस्‍तान’ का महंगा सौदा करके गच्‍चा खा चुके कई सिनेमा मालिकों ने ‘2.0’ को रिलीज करने का फैसला ही त्‍याग दिया है। वजह साफ है। वितरकों को इस बात का खौफ है कि कहीं ‘2.0’ का भी हाल ‘ठग्‍स ऑफ हिंदुस्‍तान’ वाला न हो जाये।

सबसे खतरनाक बात तो ये सुनने में आ रही है कि पटना में बैठे वितरण के लोग सिनेमाघर के मालिकों से जो डीलिंग कर रहे हैं, उसमें से 70-75 फीसदी आरटीजीएस करने और बाकी रकम कैश में देने के लिए दबाव बना रहे हैं। जाहिर है कि वहां झोलझाल करने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में कैशलेस इंडिया का सपना देख रहे मोदी सरकार को चाहिए कि इस तरह के फिल्‍म वितरकों पर ध्यान दे और इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।

 

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