जातिवाद के जहर और गंदे गीतों के सिवा कुछ भी नहीं है ‘वीर अर्जुन’ में


भोजपुरी इंडस्‍ट्री को बर्बादी के गर्त से निकालने के लिए कुछ लोगों ने जहां नये सिरे से कमर कसकर काम करना शुरू किया है, वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो अपने फायदे के लिए इंडस्‍ट्री को धकेलकर वापस वहीं पहुंचा देना चाहते हैं। प्रमोद प्रेमी जैसे घटिया गायक को लेकर घटिया फिल्‍मों का बनाया जाना इस बात का सबूत है। ‘वीर अर्जुन’ का ट्रेलर देखकर साफ पता चल रहा है कि उसमें न तो कोई कंटेंट है और न ही कोई स्‍टोरी। बस बॉलीवुड और साउथ की फिल्‍मों की एक गंदी सी खिचड़ी बना दी गयी है।

सच कहा जाये तो फूहड़ दृश्‍यों वाली इस फिल्‍म में जातिवाद के जहर और गंदे गीतों के सिवा कुछ भी नहीं है। बार-बार अहीर…यादव…और ठाकुर की बात की जा रही है। इससे एक वर्ग विशेष को भले ही अच्‍छा लगे, लेकिन बाकी लोग इससे परहेज ही करेंगे और इसका खामियाजा इसके निर्माता को निश्‍चित रूप से भुगतना पड़ेगा।

प्रमोद प्रेमी, राकेश पांडेय, प्रियंका राय और विद्या सिंह अभिनीत इस फिल्‍म के 4 मिनट के ट्रेलर को नहीं झेलते बन रहा है तो ढाई घंटे की फिल्‍म कोई कैसे झेल पायेगा। संगीत में भी किसी तरह का नयापन नहीं है। सारी धुनें पुरानी ही लग रही हैं।