Menu
0 Comments

जय हिंद’ का ट्रेलर जारी : ना विषय नया, ना एक्‍टिंग और ना ही एक्‍शन

आधा दर्जन निर्माताओं अभय सिन्‍हा, प्रशांत जम्‍मुवाला, अपर्ना शाह, विशाल गुरनानी, समीर आफताब और सह-निर्माता मेड्ज मूवीज के आपसी सहयोग से बनी लेखक-निर्देशक फिरोज खान की फिल्‍म ‘जय हिंद’ का ट्रेलर इसी हफ्ते रिलीज हुआ है। इसका शीर्षक ही बयान कर देता है कि ये देशभक्‍ति पर आधारित होगी और है भी। लेकिन देशभक्‍ति के नाम पर विषय वही उठाया गया है, जिसको देख-देखकर दर्शकों में दहशत फैल चुकी है। समझ में नहीं आता कि भारत में पाकिस्‍तान द्वारा आतंकवाद फैलाने और भारत द्वारा आतंकवाद के सफाये पर और कितनी फिल्‍में ये लोग बनायेंगे।

याद रहे, खुद पवन सिंह ही इस तरह की कई फिल्‍में कर चुके हैं। इसमें भी उनकी उसी तरह की एंट्री, वैसी ही डायलॉगबाजी, वैसे ही स्‍टंट, वैसे ही दोअर्थी गाने, चुम्‍मा चाटी…धूम-धड़ाम खेल तमाम…बस। और हां, इस फिल्‍म की थुलथुल हीरोइन मधु शर्मा पवन सिंह के साथ किसी भी तरह मेल नहीं खातीं। देखने में वो पवन सिंह से उम्र में काफी बड़ी नजर आ रही हैं। इंडस्‍ट्री के कुछ लोगों ने तो इस जोड़ी पर इस तरह के कमेंट किये कि उसका यहां जिक्र करना मुनासिब नहीं होगा। एक तो भारी भरकम बदन, ऊपर से तंग कपड़े…सच कहा जाये तो वह तालमेल को और खराब कर रहा है।

ट्रेलर में गार्गी पंडित भी एक जगह नजर आती हैं, बड़े शालीन अंदाज में। ये भी अपने आप में चौंकाऊ ही है। क्‍योंकि आजकल उन मोहतरमा की इमेज एक आइटम गर्ल या महिला की बनकर रह गयी है। इसका कारण ये है कि वो अश्‍लीलता परोसने के मामले में आजकल लीड कर रही हैं। याद है न, प्रदीप पांडेय के साथ वाला वो सीन, जिसमें वह गार्गी उर्फ प्रियंका पंडित के ब्‍लाउज को आगे से खींचकर उसके अंदर झांकता है।

सोशल मीडिया में अपने आपको बहुत बड़ा एक्‍टर के रूप में पेश करनेवाले संजय पांडेय 90 के दशक के शक्‍ति कपूर की याद दिला रहे हैं। वैसा ही गेट-अप, वहीं अंदाज….मुंह बनाकर वैसे ही बोलने का प्रयास करना….हद हो गयी। अरे कभी कभार तो कुछ मौलिक करने का प्रयास कीजिए महाराज। क्‍यों नहीं थोड़े दिन अवधेश मिश्रा से एक्‍टिंग सीख लेते।

कुल मिलाकर पाकिस्‍तान मार्का जैसे बोरिंग सब्‍जेक्‍ट पर बनी इस फिल्‍म में मोटी-मोटी हीरोइनों के बीच दबे पवन सिंह किसी भी तरह का नया आकर्षण पैदा करने में नाकाम रहे हैं। हीरोइनों से तो भगवान बचाये। गीत-संगीत भी आम भोजपुरी फिल्‍मों की ही तरह है। उसमें भी ऐसा कुछ नयापन नहीं दिखा, जो लोगों को थियेटरों तक आने के लिए मजबूर कर सके।

Tags: , ,
error: Content is protected !!