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चमगादड़ (वैम्पायर बैट ) का थूक बचाये दिल के दौरे से ! जानिए एक्सपर्ट की राय?

जब हृदय तक रक्त ले जाने वाली धमनी में रक्त के थक्के उत्पन्न हो जाते हैं ,तो रक्त हृदय तक नहीं पहुँच पाता .इसका उपचार अभी तक थक्कों को घोलने वाली दवाओं के द्वारा किया जाता था ,पर इनसे रक्तस्राव होने का खतरा बना रहता था .जीव वैज्ञानिकों को यह पहले से ही ज्ञात था कि चमगादड़ अपने शिकार को काटते हैं,तो अपने थूक द्वारा ऐसे तत्व का स्राव करते हैं,जिससे शिकार का खून न जमने पाये.मर्क ,शार्प और ढोम के वैज्ञानिकों ने वैम्पायर बैट कि एक प्रजाति से खून खून को न जमने देने वाला वह पदार्थ ढूँढ निकाला और इससे ‘बैट पी. ए.’ नामक कारगर दवा बनायीं .
सन१९९१ में शोधकर्ताओं ने इस दवा का परीक्षण खरगोशों पर किया और पाया कि पहले प्रयोग कि जाने वाली औषधियों की अपेक्षा यह दवा दुगुने वेग से रक्त के थक्कों को घोलती है और रक्त स्राव भी नहीं होने देती .

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