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हौसलों का कारवां साथ लिए चलता हूं,
दिया तले अन्धेरा वाले अंदाज में जलता हूं।।
अगर किसी मोड़ पर कोई साथ चलना छोड़ दे।
तो भी अपनी मंजिल को पाने की औकात रखता हूं।।

ये महज शेर नहीं, बल्‍कि एक भोजपुरी निर्माता के दिल का दर्द है और उस दर्द को उसने अपने फेसबुक एकाउंट पर शेयर किया है। साथ में अपनी उस फिल्‍म का पोस्‍टर भी प्रकाशित किया है, जिससे यह दर्द मिला है और जिसके पोस्‍टर अपनी कामयाबी का बयान कर रहे हैं। जी हां, हम बात कुछ समय पहले रिलीज हुई खेसारी लाल यादव की फिल्‍म ‘दुलहिन गंगा पार के’ की कर रहे हैं। इसी फिल्‍म के लिए इसी फिल्‍म के हीरो खेसारी लाल यादव ने ही अरविंद आनंद को दर्द दिया है।

दरअसल, ‘दुलहिन गंगा पार के’ एक पारिवारिक फिल्‍म है और इसने लोगों की अपेक्षा के विपरीत जाकर बिजनेस किया है। हालांकि अरविंद आनंद ने इस फिल्‍म के निर्माण में जो लागत लगायी है, उसकी भरपाई अभी तक नहीं हो पायी है, लेकिन अच्‍छी बात यह है कि फिल्‍म अपने बूते पर हर जगह अच्‍छा-खासा कलेक्‍शन कर रही है। वजह साफ है और वो ये कि यह अपेक्षाकृत साफ-सुथरी एवं भावनाप्रधान होने के कारण महिलाओं को खासी पसंद आ रही है।

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बावजूद इसके अरविंद आनंद जी आज भी दुखी हैं, क्‍योंकि खेसारी ने उनके साथ सहयोगपूर्ण रवैया नहीं अपनाया। वास्‍तव में अरविंद आनंद भोजपुरी के अन्‍य निर्माताओं के मुकाबले अलग हैं। वो एक पढ़े-लिखे, सुलझे हुए इंसान के साथ ही एक लोकप्रिय सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं।

अरविंद आनंद को आज मलाल इस बात का है कि अगर खेसारी ने उनकी फिल्‍म ‘दुलहिन गंगा पार के’ को प्रमोट किया होता तो आज उनकी लागत लौट चुकी होती। अरविंद आनंद ने खेसारी की बहुत सिफारिश की कि वो समय निकालकर उनकी फिल्‍म को प्रमोट कर दे, लेकिन खेसारी ने व्‍यस्‍तता का हवाला देकर उन्‍हें प्रमोशन के लिए कभी वक्‍त नहीं दिया।

अरविंद आनंद खुद बताते हैं कि खेसारी को प्रमोशन के लिए मनाने वो उत्‍तर प्रदेश के गोरखपुर तक चले गये थे, जहां खेसारी उस समय ‘बलम जी आई लव यू’ की शूटिंग कर रहे थे, बावजूद इसके खेसारी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।

खेसारी को शायद इस बात का एहसास नहीं था कि वो अरविंद आनंद के साथ इस तरह का बर्ताव कर अपने ही पैर में कुल्‍हाड़ी मार रहे हैं। हालांकि अरविंद आनंद अपने बल पर अपनी फिल्‍म को अलग-अलग जगहों पर रिलीज कर रहे हैं और उनकी फिल्‍म को लोगों का प्‍यार भी मिल रहा है, लेकिन इतना तो कहना ही पड़ेगा कि खेसारी ने उनके साथ अच्‍छा नहीं किया। वो खेसारी, जो आज कथित रूप से 40 गाड़ियों का लाव-लश्‍कर लेकर ‘राजा जानी’ को प्रमोट कर रहे हैं और मीडिया में कवरेज दिलवा रहे हैं।

 

 

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1 thought on “खेसारी लाल के दिये दर्द को नहीं भुला पा रहे हैं निर्माता अरविंद आनंद”

  1. LB YADAV says:

    KHESARI KO HAR FILM KO PROMOTE KRNA CHAHIYE

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