खेसारी लाल की ‘नागदेव’ हो गयी निर्माता नीलाभ तिवारी तंगहाली का शिकार : दर्शकों में भारी रोष

खेसारी लाल की ‘नागदेव’ की रिलीज तो सांप सीढ़ी का खेल बनकर रह गयी है। न तो निर्माता नीलाभ तिवारी ही कुछ साफ बता पा रहे हैं और न ही वितरक अमित कुकरेजा ही। हद तो ये कि आज खेसारी भी सुबह फेसबुक पर लाइव होकर दर्शकों से कह रहे थे कि दर्शक थियेटर में जाकर उनके ‘नागदेव’ को अपना प्‍यार दें, लेकिन उनको भी नहीं पता कि फिल्‍म कब रिलीज होगी। मीडिया में आयी खबरों के अनुसार ‘नागदेव’ की बड़ी दिलचस्‍प कहानी है। जरा सुनिए-

सूत्रों के अनुसार नीलाभ तिवारी ने बतौर निर्माता खेसारी लाल और काजल राघवानी को लेकर देव पांडेय के निर्देशन में जब इस फिल्‍म को बनाना शुरू किया, तभी उनकी झोली खाली थी। सारा मामला फाइनेंसर के भरोसे था। यही कारण था कि निर्माण के दौरान ही ये फिल्‍म अटक गयी थी। तब इस फिल्‍म में पंजाब के डिसट्रीब्‍यूटर अमित कुकरेजा की एंट्री हुई, जिन्‍होंने पहले इसे पंजाब और दिल्‍ली में रिलीज करने का अधिकार लिया हुआ था। इधर ‘नागदेव’ का वितरण अधिकार दीपू सिंह ने खरीद रखा था। बाद में अमित कुकरेजा ने बिहार में भी दीपू सिंह के साथ पार्टनरशिप कर ली। मामला यहीं नहीं खत्‍म हुआ, अमित कुकरेजा ने दीपू सिंह की नाजानकारी में अपने हिस्‍से की भागीदारी किसी और वितरक को दे दी, जिस पर अमित कुकरेजा और दीपू सिंह में विवाद हो गया था। दीपू सिंह ने उस विवाद को सुलझाने के लिए कोर्ट का रुख किया तो अमित कुकरेजा ने मिल बैठकर उसे सुलझा लिया और तय ये हुआ कि दीपू सिंह साउथ बिहार और कटिहार में ‘नागदेव’ को रिलीज करेंगे, जबकि बाकी हिस्‍सों में रिलीज की जिम्‍मेदारी अमित कुकरेजा निभायेंगे।

सबसे अजीब बात तो ये है कि रिलीज का समय आने पर फिल्‍म डाउनलोड हो गयी और वो क्‍यूब डिजिटल फॉर्मेट में अरेराज के श्री मां सिनेमा में रिलीज भी हो गयी, लेकिन फाइनेंसर से यू एफ ओ डिजिटल का आर ओ न मिलने के कारण यह बाकी सिनेमाघरों में रिलीज हो ही नहीं पायी।

सूत्रों की मानें तो इसकी रिलीज का पेंच तब फंसा, जब अमित कुकरेजा ने अपने हिस्‍से के 51 लाख रुपये तो किसी तरह मैनेज करके फिल्‍म के फाइनेंसर एन.आर. पचीसिया को चुका दिये, लेकिन बाकी 18 लाख की रकम दिवालिया हो चुके निर्माता नीलाभ तिवारी ने चुकाये ही नहीं। जाहिर है कि पैसा नहीं तो आर ओ नहीं। बस यही कारण है कि इसकी रिलीज अटकी पड़ी हुई है। सबसे दुख की बात तो यह है कि मीडिया द्वारा संपर्क किये जाने पर नीलाभ तिवारी कुछ भी सही-सही जवाब नहीं दे रहे हैं। बस गोल-गोल घुमाये जा रहे हैं। किसी ने सच ही कहा है कि तीर्थाटन करने तभी जाना चाहिए, जब झोली में कुछ हो।

कुल मिलाकर एक बात साफ हो गयी है कि आज की तारीख में जो भी भोजपुरी फिल्‍में बन रही हैं, उनमें से 90 फीसदी निर्माता केवल लोगों को उल्‍लू बना रहे हैं। उनके पास खुद के पैसे तो हैं नहीं, बस एक की टोपी दूसरे के सिर पर पहनाने का काम कर रहे हैं। और उनकी सारी बादशाहत अंदर घुस जा रही है, जब फिल्‍म रिलीज की बारी आती है।

खास तौर से ‘नागदेव’ के मामले में सबसे हैरतअंगेज बात यह देखने को मिली है कि एक्‍टिंग में अपने ढहते साम्राज्‍य के मद्देनजर राजनीति में नया आधार तलाशते दानवीर खेसारी ने लाइव होकर अपने चहेतों से ‘नागदेव’ को देखने की अपील भी कर दी और लगे हाथ अपने दान का महिमागान भी कर दिया, जबकि खबर लिखे जाने तक फिल्‍म रिलीज हुई ही नहीं है। दर्शकों के साथ खेसारी को इतना घटिया मजाक नहीं करना चाहिए।

खबर लिखे जाने तक अंदर के सूत्रों से पता चला है कि निर्माता और वितरक खेसारी लाल की सिफारिश में लगे हुए हैं। उनका कहना है कि इस फिल्‍म की रिलीज में वो मदद कर दें ताकि फिल्‍म के साथ ही खेसारी समेत सबकी इज्‍जत रह जाये। हम भी तहेदिल से यही चाहते हैं कि ‘नागदेव’ रिलीज हो, क्‍योंकि बिहार में सिनेमाघरों की हालत पहले से ही बहुत खराब है। इस फिल्‍म के रिलीज न होने से उन सिनेमाघरों को बहुत ज्‍यादा नुकसान पहुंचा है, जिन्‍होंने इसकी बुकिंग कर रखी थी। दर्शक खफा हैं, सो अलग।

Posted by Khesari Lal Yadav on Wednesday, November 14, 2018

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