खेसारी की ‘राजा हिंदुस्‍तानी’ के निर्माता राहुल खान के खिलाफ वाराणसी में एफ आई आर दर्ज

खेसारी लाल और काजल राघवानी की फिल्‍म ‘राजा हिंदुस्‍तानी’ के निर्माता राहुल खान के खिलाफ बनारस में एफ आई आर दर्ज करा दिया गया है। बनारस के लंका थाना में दर्ज उस एफ आई आर में सर्वेश्‍वरी होटल, नगवा, लंका, वाराणसी के मालिक संदीप सिंह ने कहा है कि फिल्‍म के निर्माता राहुल खान ने कहा है कि राहुल उनके होटल में ठहरी फिल्‍म की यूनिट का खर्च दिये बिना ही होटल छोड़कर किसी को बताये बिना ही भाग गये।

एफ आई आर करवाने वाले लोगों में संदीप के अलावा रविशंकर मौर्या, राजू धोबी, विजय श्रीवास्‍तव, आशीष, विनय टेलर और रामू का भी नाम दर्ज है। सभी लोगों का मिलाकर कुल तकरीबन 5 लाख बकाया राहुल पर निकलता है।

गौरतलब है कि गत् अगस्‍त के महीने में ‘राजा हिंदुस्‍तानी’ की यूनिट बनारस गयी हुई थी। वहां निर्माता ने यूनिट के साथ बेहद रुखा व्‍यवहार किया। यहां तक कि यूनिट के लोगों को खाना देना तो दूर, नाश्‍ता तक कायदे से नहीं दिया। आखिरकार लोग तंग आकर आधे-अधूरे में ही शूटिंग छोड़कर मुंबई भाग आये। ऐसा भी नहीं है कि इस फिल्‍म का निर्माता कोई नया शख्‍स हो और उसे इस बारे में ज्‍यादा मालूमात न हो। इस फिल्‍म के निर्माता राहुल खान और निर्देशक मंजुल ठाकुर हैं, जिनकी जोड़ी इससे पहले ‘निरहुआ हिंदुस्‍तानी 2’ बना चुकी है। इसके अलावा भी इन्‍होंने फिल्‍में की हैं।

सूत्रों से पता चला है कि इस फिल्‍म की यूनिट नाश्‍ता और खाने के लिए तरस गयी। भूखों मरने की नौबत आ गयी थी। मांगने पर भी उन्‍हें न तो समय पर कायदे से नाश्‍ता ही मिला और न ही खाना दिया गया। नतीजा लोग वहां से जान बचाकर भाग खड़े हुए।

बहरहाल, यूनिट के लोगों पर जो कुछ गुजर रही थी, उसे उन्‍होंने अपने ग्रुप में शेयर किया, जिससे ये बात सामने आ पायी।’राजा हिंदुस्‍तानी’ के सेट पर बदइंतजामी से त्रस्‍त यूनिट का एक शख्‍स ग्रुप में कह रहा है कि बह मोदी के राज में बहुत कमा रहा है, इसलिए देश के बारे में नहीं, ‘राजा हिंदुस्‍तानी’ के बारे में बात करना चाह रहा है। वो कहता है कि खाना तक नसीब नहीं हो रहा है इस फिल्‍म के सेट पर, इसलिए हिम्‍मत है तो शेर की तरह इस बारे में बात करो। लोगों को यह बताओ कि नाश्‍ता में पोहा यानी चिवड़ा आया है। खाओ सभी लोग पोहा और बॉडी बनाओ।
ग्रुप में दूसरा सदस्‍य कह रहा है- इंडस्‍ट्री में आये 25 साल होने को आ गये। मेरी जिंदगी की यह पहली फिल्‍म है, जिसमें लोगों को धमकाकर, गुंडों से डरवाकर काम करवाया जा रहा है। यहां सारा काम दादागिरी से करवाया जा रहा है। इसलिए इस फिल्‍म का नाम ‘राजा हिंदुस्‍तानी’ नहीं, ‘गुंडाराज’ रख देना चाहिए। बिना खाना खिलाये काम करवा रहे हैं सब।

सेट पर निर्माता की दुर्व्‍यवस्‍था से आहत एक अन्‍य सदस्‍य सवाल करता है- भाई एक बात बताओ, क्‍या पोहा खाकर ‘4 के’ जैसा वजनदार एक्‍विपमेंट उठता है, क्‍या डिनो उठता है, या सोलर उठता है…ये भाई ये कोई हाथ में पानी का बोतल लेकर घूमने का काम नहीं है, ये 250 ग्राम की तलवार लेकर सेट पर घूमने जैसा नहीं है….भाई 50-100 किलो का वजन उठाना पड़ता है। सीने की हड्डी चटकती है। जो उठाता है, वही समझता है। नाश्‍ते में कभी पोहा देता है तो कभी उपमा लाकर थमा देता है। कभी दाल कम पड़ती है तो उसी में पानी मिलाकर दे देता है। पहली बार ऐसी किसी फिल्‍म में काम कर रहा हूं, जहां लोग जोर-जबर्दस्‍ती से काम करवा रहे हैं। मेरा पैक-अप करवाओ भाई, मेरा हिसाब दो, मुझे चलता करो।

एक दूसरे शख्‍स को ये बातें जब अच्‍छी नहीं लगती हैं तो वह कहता है कि ग्रुप में ये सब बातें करके कुछ फायदा नहीं। प्रोडक्‍शन में इरफान वगैरह हैं, उनसे बात कर लो।

लाइटवाला जितेंद्र पटेल तो अपना कार्ड नंबर तक बताते हुए कहता है- 200 फिल्‍में, अनगिनत सीरियलें की हैं, हिंदी फिल्‍में की हैं, लेकिन ऐसा पहली बार देख रहा हूं कि दादागिरी से काम करवाया जा रहा है। मंडल साहब सही बात कह रहे हैं। हमारे सेठ भी सुन लें, हमने सारे इक्‍विपमेंट त्‍याग दिये हैं। ऐसा पहला प्रोड्यूसर और प्रोडक्‍शन वाला देखा  है मैंने, जो खाना बगैर मार रहा है। अरे भाई बिना खाये पीये कोई कैसै काम करेगा? चार घंटा अधिक काम करवा लो, लेकिन कम से खाना-पानी तो दो।

एक शख्‍स कह रहा है कि खाना देना डायरेक्‍शन डिपार्टमेंट का काम नहीं है। जवाब में सामने वाला कहता है कि ये बात सच है। लेकिन सुना है कि आपके डिपार्टमेंट में भी कई लोगों को खाना नहीं मिला है, क्‍या आपका फर्ज नहीं बनता कि आप जाकर पूछें कि ऐसे काम कैसे हो पायेगा?

ग्रुप में दो लोगों के बीच कॉल टाइम को लेकर भी बहस हो रही है। जिसमें वो अपनी-अपनी बातें और अपना-अपना पक्ष रख रहे हैं। महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न यह है कि आखिर भोजपुरी इंडस्‍ट्री में जूनियर कलाकारों और तकनीशियनों के साथ ही हमेशा दुर्व्‍यवहार क्‍यों होता है? क्‍या निर्माता महोदय को इतनी हिम्‍मत होगी कि वो खेसारी और काजल को नाश्‍ते में पोहा देंगे? कभी नहीं देंगे…फिर बाकी लोगों के साथ ऐसा क्‍यों? क्‍या उनके सहयोग के बिना किसी फिल्‍म का निर्माण संभव है?

 

 

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