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खुशखबरी ,डायबिटीज के रोगियों के लिये ! जानिए विशेषज्ञों का मत ?

दक्षिण भारत के लगभग सभी गैरों से आपको आम शारीरिक तकलीफों की कोई न कोई दवा मिल जाएगी .ये घरेलू नुस्खे कभी-कभी तो जानी – पहचानी दवाओं की भी छुट्टी कर देते हैं.”यदि आप डायबिटीज के मरीज हैं,तो ‘इन्सुलिन’ का चक्कर छोड़िये और ‘सदाबहार ‘ के फूल अपनाइये !” यह सलाह देते हैं अर्नेस्ट अब्राहम ,जो ‘कोलर गोल्ड कील्ड्स ‘इंजिनियर हैं,तमिल में नित्य कल्याणी ‘और मलयालम में ‘अधनेव’ नाम से मशहूर सदाबहार के फूल कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में डायबिटीज की दवा के तौर पर काम में लाये जाते है.आमतौर पर ये फूल लाल और सफ़ेद रंग में पाये जाते हैं. पर लाल रंग के फूल दवा के तौर पर सफ़ेद फूलों की तुलना में ज्यादा गुणकारी होते हैं.अब्राहम अपने मरीजों को दिन में ८-१० फूल खाने की सलाह देते हैं .उन्होंने यह नुस्खा अपने पिता से सीखा था ,जो खुद भी डायबिटीज के मरीज थे .अब्राहम अपने नुस्खे की कामयाबी के सबूत के तौर पर डायबिटीज के उन मरीजों की ब्लड और यूरिन रिपोर्ट बताते हैं,जो उनका नुस्खा आजमाकर स्वस्थ हो चुके हैं.और भी बेहतर फायदे के लिये ,अब्राहम यह सलाह देते हैं कि ‘सदाबहार ‘उर्फ़ ‘नित्यकल्याणकारी ‘उर्फ़ ‘अधनेव ‘के पत्ते भी काम में लाये जायें.मगर इससे पहले मरीज को अपना खून टेस्ट करवा के,उसमे मौजूद शक्कर की सही मात्रा जान लेनी चाहिये ,ताकि यह अचानक घटने न पाये

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