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भोजपुरी फिल्‍मों को लेकर फेसबुक और इंस्‍टाग्राम पर जो प्रचार किया जाता है, उससे होशियार। हिट, सुपर हिट, भारी सफलता के साथ चल रही है, धूम मचा रही है….आदि बातें लिखकर आजकल उन्‍हीं फिल्‍मों को प्रचारित किया जा रहा है, जिनके निर्माण में लागत अधिक आयी है।

अब देखिए न, पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया में ये प्रचारित किया जा रहा था कि पवन सिंह की ‘क्रेक फाइटर’ सुपर हिट हो गयी है। फलां सिनेमा में पांचवें सप्‍ताह में सफलता पूर्वक चल रही है तो फलां सिनेमा में छठवें सप्‍ताह में। एक बंदे ने तो लिखा कि शंकर सिनेमा सीतामढ़ी में सातवें सप्‍ताह में धूम मचा रही है।

ऐसे में लोगों के सामने इस हकीकत को लाना बेहद जरूरी हो गया था कि हकीकत क्‍या है।

हमारे सूत्र ने जब शंकर सिनेमा, सीतामढ़ी में ‘क्रेक फाइटर’ के कलेक्‍शन का पता किया तो दंग रह गया। फिल्‍म को लगे सात सप्‍ताह हो गये और कलेक्‍शन 4 लाख भी नहीं। यही है भोजपुरी फिल्‍मों की हकीकत।

जाहिर है कि आपके मन में एक सवाल चल रहा होगा कि फिर सिनेमा मालिक ने क्‍यों लगा रखा है। तो जान लीजिए- एक तो कोई बड़ी फिल्‍म रिलीज नहीं हुई कि ‘क्रेक फाइटर’ को उतारकर उसे लगाया जाये। दूसरे इस फिल्‍म के वितरक निशांत के तमाम सिनेमाघरों से अपने व्‍यक्‍तिगत संबंध हैं। हालांकि कुछ लोगों का ये भी कहना है कि पटना में बैठे तमाम वितरकों पर सिनेमाघरों की कुछ न कुछ लेनदारी निकलती है, इसलिए भी कई बार वितरक कह देता है कि जब तक कोई बड़ी फिल्‍म नहीं आती है, तब तक वो लगाये रखे। जो निकल जाये वही सही।  

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