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केला एक बहुत ही स्वास्थ्यवर्धक व गुणकारी फल है .केले की गिनती हमारे देश के उत्तम फलों में होती है,और इसको मांगलिक कार्यों में भी विशेष स्थान दिया गया है.विदेशों में भी इसके गुणों के कारण इसे स्वर्ग का सेव ,और आदम की अंजीर नाम से प्रदान दिये गये हैं.
हिंदी में केले के नाम से जाना जाने वाला यह फल असमिया में ‘कोल’,बंगला में ‘काला’,गुजरती में ‘केला ‘,कन्नड़ में ‘वझा’,मराठी में ‘कदलीद्ध;या केले’, उड़िया में ‘कोडोली’या रोमभा;,तमिल में ‘वझाई ‘,तेलगु में ‘आसी’ अंग्रेजी में प्लेन्टेन() और लेटिन में ‘म्यूसा पैराडाइजीएका ‘नाम से पुकारा जाता है. वनस्पति जगत के ‘म्यूसेसी’कुल में रखा गया है.
केले से जुडी एक गलतफहमी :
आमतौर पर लोगों की यह धारणा होती है कि केले खूब पक जाते हैं या पिलपिले हो जाते हाँ,तब उनमे कीटाणुपैदा हो जाते हैं, किन्तु डॉक्टर टालरिको के अनुसार यह एक गलतफहमी है.वे कहते है कि जब तक केले का छिलका उसके गूदे पर पूरी तरह चिपका होता है ,तब तक वह कीटाणुरहित रहता है .लिहाजा खूब पके हुये केले भी पूरी तरह खाने योग्य एवं हानिरहित हैं.
कुछ लोगों कि यह धारणा भी है कि केले पचने में भरी होते हैं,दरअसल कच्चे या अधपके केलों को खाने से ऐसा होता है,क्योंकि ये आसानी से हमारे पेट में सरलता से पचने वाली शर्करा में परिवर्तित नहीं होते.फिर भी केले को खाने के बाद यदि भारीपन महसूस हो तो एक या दो इलायची ऊपर से खाने से तुरन्त पेट में हल्कापन आ जाता है.डॉ.विलियम टिबलास के अनुसार केले के छिलके का हरा रंग लुप्त होते ही वे खाने योग्य हो जाते हैं और यहाँ तक कि उनके छिलके काले हो जाने के पश्चात् भी खाने योग्य रहते हैं,बशर्ते उसका छिलका गूदे से चिपका हो.
केले के गूदे में १.५ प्रतिशत प्रोटीन ,लगभग ३ प्रतिशत विटामिन्स ,२० प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट्स और बाकी ज्यादातर जल तत्व होता हैं.लिहाजा पके हुये केलों को खाने से अजीर्ण नहीं होता .भारतीय ग्रंथो में भी केला और दूध साथ -साथ खाने को पूर्ण भोजन कहा गया हैं.
छोटे बच्चों को नित्य कम से कम एक केला खिलाने से उनमे उत्तम विकाश देखा जा सकता है.केले के भक्षण से शरीर में ताकत की वृद्धि होती है ,
1-पके केले के गन : स्वादिष्ट ,शीतल ,वीर्यवर्धक ,शरीर के लिए पुष्टिकारक ,माँस को बढ़ाने वाला ,भूख,प्यास को दूर करने वाला तथा नेत्र रोग और प्रमेह नाशक है.
2-कच्चे केले के गुण : शीतल,ग्राही (यानी जो अपनी क्रिया द्वारा शरीर के दोष ,मल व धातु को सोख ले )पाचन में भारी,रक्त,पित्त,वायु .कफ विकार तथा क्षय को दूर करने वाला होता है .

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