कुमार विकल की धोखाधड़ी : मुहूर्त पर मुहूर्त, पर फिल्म एक भी नहीं बन पा रही है, आखिर क्यों?

भोजपुरी इंडस्ट्री  में एक खास बात देखने को मिल रही है। यहां जितने लोग भी चार सौ बीसी या धोखाधड़ी करते हैं, वो इस काम के लिए बड़े-बड़े हीरो-हीरोइनों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे ही एक महाशय हैं कुमार विकल, जो भोजपुरी फिल्मों के लिए डायरेक्शन करते हैं। सूत्रों की मानें तो विकल आजकल नये लोगों को हीरो बनाने का झांसा देकर अच्छी खासी रकम झटक रहे हैं। मजे की बात तो ये है कि इसके लिए वो इंडस्ट्री  के कुछ बड़े चेहरों का इस्तेमाल भी लगातार कर रहे हैं।दरअसल, विकल ने सबसे पहले पवन सिंह, अक्षरा, मोनालिसा, सीमा सिंह, अंजना सिंह जैसे बड़े सितारों को लेकर ‘करेला कमाल धरती के लाल’ बनाकर लोगों की नजर में खुद को बड़ा निर्देशक के तौर पर स्थालपित किया। फिर उसी को भुनाना शुरू कर दिया और आज तक भुना रहे हैं। ये और बात है कि उस फिल्म  को बनाने के बाद उसके निर्माता का हाल बेहाल हो गया था।

वास्तव में हर निर्देशक का अपना एक सेट-अप होता है और उसके कुछ फिक्स  कलाकार होते हैं। विकल ने भी इंडस्‍ट्री के कुछ कैरेक्टर आर्टिस्टों  के साथ सेटिंग जमा रखी है और वो कलाकार उनकी हर फिल्म में नजर आते हैं, लेकिन हीरो हर फिल्म में बदल जाता है। जानते हैं क्यों… वो इसलिए कि पैसा उसी का लगा होता है।अब जरा इस खेल को समझिए। विकल जी पवन और अक्षरा को लेकर फिल्म  बना चुके हैं, इसलिए लोग तो उनको जानते ही हैं और जो नहीं जानते हैं, उन्हें वो खुद ही जना देते हैं। असल में जो लोग विकल के शिकार हो चुके हैं, उनके अनुसार विकल पहले किसी को भी यह कहकर फांसते हैं कि वो पवन, अक्षरा, अंजना, सीमा सिंह आदि को लेकर फिल्म बना चुके हैं, जो कि सच भी है। जाहिर है, लोगों को ये जानने के बाद उन पर यकीन आ जाता है और वो ये मान बैठते हैं कि जब पवन और अक्षरा को लेकर वो फिल्म बना चुके हैं तो उनकी ये फिल्म भी बनेगी ही। फिर विकल उस बंदे को यह समझाते हैं कि अगर वह पैसे लगाये तो उसे हीरो बना देंगे। फिर तो हीरो बनने या फिल्म में काम पाने के लालच में लोग उनके झांसे में आ जाते हैं और अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा विकल को देने के लिए तैयार हो जाते हैं।विकल की एक खास बात और जान लीजिए, वो हमेशा नकद ही लेने में भरोसा रखते हैं। और फिर नकद लेने के बाद एक धमाकेदार मुहूर्त करते हैं, ताकि उनकी धमक इंडस्ट्री में महसूस की जाये। फिर मीडिया को मैनेज किया जाता है। इधर-उधर खबरें छपती हैं। अंत में पैसा हजम और खेल खतम हो जाता है। मिसाल के तौर पर विकल के निर्देशन में बननेवाली ‘सन्नाटा’ को देख लीजिए। कई लोगों से काम देने के एवज में पैसे ऐंठ लिए विकल ने , लेकिन फिल्म आज तक बनी ही नहीं। गुंजन पंत को लेकर हाल ही में बनायी गयी ‘गंगा की बेटी’ को देख लीजिए। सूत्रों के अनुसार विकल ने ‘गंगा की बेटी’ के निर्माता से यही कहा था कि फिल्म 20 लाख में पूरी हो जायेगी, लेकिन बजट चला गया 40 लाख और फिल्म  का अभी तक कहीं अता-पता नहीं है। इसके अलावा वो ‘घायल खिलाड़ी’, ‘कफन’, ‘जन्‍मभूमि’ जैसी और भी कई फिल्‍मों का मुहूर्त करके अपना उल्‍लू सीधा कर चुके हैं।

लोगों के साथ चार सौ बीसी का ये खेल मुंबई से लेकर बिहार और दिल्ली तक खेला जा चुका है। लोग विकल के इस खेल से बखूबी वाकिफ हो चले हैं। तभी तो विकल के खिलाफ दिल्ली के विकासपुरी थाने में चारसौबीसी का केस तक दर्ज कराया गया है और उनके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट तक जारी हो चुका है, लेकिन विकल भागे-भागे फिर रहे हैं।

ताजा खबर ये है कि विकल फिलहाल नेपाल में अपना जाल बिछाये हुए हैं और सुनने में आ रहा है कि कोई नयी मछली फंसने को तैयार हो गयी है। लेकिन इधर दिल्ली से लेकर बिहार तक कुछ लोग विकल को पाने के लिए विकल हुए जा रहे हैं, जिनके पैसे विकल ऐंठ चुके हैं।newsgossip.in के पास ऐसे गड़बड़ घोटालों के तमाम साक्ष्‍य मौजूद हैं ।

 

 

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