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ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की बहन गीता मेहता ने पद्मश्री पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया है| गीता मेहता का कहना है कि केंद्र की मोदी सरकार आगामी लोकसभा चुनाव में राजनीतिक फायदा लेने के लिए यह पुरस्कार दे रही है,  जिसके चलते वो इसे स्वीकार नहीं कर रही हैं| गीता मेहता को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए यह पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई थी|

गीता मेहता ने पुरस्कार नहीं लेने का ऐलान करते हुए कहा, “मुझे पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया, यह मेरे लिए सम्मान की बात है| मुझे यह पुरस्कार लेने से इनकार करते हुए बहुत दुख हो रहा है, क्योंकि यह पुरस्कार उस समय दिए जाने की घोषणा की गई है, जब आम चुनाव बेहद करीब आ गए हैं| पुरस्कार लेने से इनकार करना मेरे और सरकार दोनों के लिए शर्मिंदगी की बात है| इसका मुझे हमेशा अफसोस रहेगा|”’ उन्होंने अमेरिका के न्यूयॉर्क से इसकी घोषणा की है|

गीता मेहता अब अमेरिका की नागरिक हैं| इस बार सरकार ने कुल 11 विदेशी नागरिकों को यह पुरस्कार देने का ऐलान किया है| गीता मेहता ने साल 1979 में “कर्मा कोला”, 1989 में “राज”, 1993 में “ए रीवर सूत्र”, 1997 में “स्नेक्स एंड लैडर्सः ग्लिम्स ऑफ मॉडर्न इंडिया” और साल 2006 में “ईस्टर्न गनेशाः फ्रॉम बर्थ टू रिबर्थ” पुस्तकें लिखी हैं| इसके अलावा उन्होंने 14 डॉक्यूमेंट्री का निर्देशन किया है|

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