ऐसा क्‍या हुआ, जो इतने हिल गये हैं खेसारी और बहकी-बहकी बातें कर रहे हैं

भोजपुरी इंडस्‍ट्री का जो मौजूदा हाल है, उसने तथाकथित तीनों बड़े सितारों को हिलाकर रख दिया है। उन्‍हें दो साल पहले तक सपने में भी ये एहसास नहीं था कि अश्‍लीलता विरोधी मुहिम एक दिन इतनी तेज होगी और लोग इनकी भौंडी फिल्‍मों को थियेटर में देखने जाना बंद कर देंगे।

सारी जिंदगी अश्‍लील सीन करने वाले खेसारी लाल यादव ने अश्‍लीलता को चरम पर पहुंचाने में खुलेआम और सबसे ज्‍यादा सहयोग दिया है और अब वो ये कहते फिर रहे हैं कि भोजपुरी फिल्‍मों में अश्‍लीलता नहीं होती। अपने दर्शकों से कहते हैं कि सारी अश्‍लीलता एलबम वाले फैला रहे हैं।

खेसारी का कहना है कि इंडस्‍ट्री में अश्‍लीलता तो वो लोग फैलाते हैं, जिनको पैसे लगाकर हीरो बनना होता है। वास्‍तव में उनका कोई नाम तो होता नहीं, अपना मुकाम तो होता नहीं, इसीलिए वो अश्‍लीलता का सहारा लेते हैं।

खेसारी ने सबसे हास्‍यास्‍पद बात यह कही कि उनकी फिल्‍मों में अश्‍लीलता होती ही नहीं, क्‍योंकि उनके परिवार वाले भी उनकी फिल्‍मों को देखने जाते हैं। उन्‍होंने यह भी कहा कि भोजपुरी फिल्‍मों के लिए बिहार में भी सेंसर बोर्ड होना चाहिए। खेसारी ने दर्शकों से हाथ जोड़कर अपील की कि वो गंदे गाने सुनना बंद कर दें। इससे गाने वाले गंदा गाना बंद कर देंगे।

सच तो यह है कि अश्‍लीलता की राह चलकर लोकप्रियता पाने की राह दिनेश लाल, पवन सिंह और खेसारी ने ही लोगों को दिखाया है और अब जब इनका साम्राज्‍य हिल रहा है तो ये दूसरों को प्रवचन दे रहे हें। बहरहाल, खेसारी को अब इस बात का भान हो चुका है कि अगर उन्‍हें  इंडस्‍ट्री में टिके रहना है तो अपनी इमेज साफ करनी होगी। यही कारण है कि खेसारी एलबम भले ही गंदे अभी भी गा रहे हैं, लेकिन फिल्‍मों के चयन में होशियारी बरतने लगे हैं। उनकी पिछले दिनों रिलीज ‘दुलहिन गंगा पार के’ देख लीजिए, वह लगभग साफ-सुथरी ही थी। इसी हफ्ते  उनकी एक और फिल्‍म ‘संघर्ष’ का ट्रेलर रिलीज हुआ है। उसे भी देखकर यही लग रहा है कि फिल्‍म में अश्‍लीलता शायद नहीं होगी।

सबसे बड़ा सच तो यह है कि खेसारी को पिछले कई महीनों में एक भी फिल्‍म नहीं मिली है, इसलिए वो घूम-घूमकर स्‍टेज शो कर रहे हैं और इस जुगाड़ में लगे हुए हैं कि किसी तरह राजनीति में एंट्री मिल जाये।

 

 

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