अरविंद अकेला ने सवा सौ करोड़ हिंदुओं की आस्‍था पर किया प्रहार : धार्मिक व सामाजिक संगठन दर्ज करायें मुकदमा


संविधान कहता है कि किसी की आस्‍था पर प्रहार नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन भोजपुरी जगत के कुछ लोग लगातार ये काम कर रहे हैं। ऐसे ही लोगों में से एक है अरविंद अकेला कल्‍लू। इसका एक अलबम रिलीज हुआ है, जिस पर जगतजननी मां दुर्गा की तस्‍वीर बनी हुई है और उस पर देवी गीत लिखा हुआ है।

लेकिन अलबम के उस गीत को सुनेंगे तो पायेंगे कि उसका मां दुर्गा या नवरात्र से कुछ लेना-देना नहीं है। ऐसा लगता है, जैसे पहले कभी का ये घटिया गाना रिकॉर्ड किया पड़ा हुआ था और एक सस्‍ती मानसिकता का परिचय देते हुए उस पर देवी गीत लिखकर और देवी की तस्‍वीर डालकर यू ट्यूब पर रिलीज कर दिया गया है। यनी जिन दर्शकों के ये सभी भगवान कहते हैं, उनकी न सिर्फ आस्‍था, बल्‍कि विश्‍वास के साथ भी खिलवाड़ किया गया है।

मनोज मिश्रा इस गीत का निर्माता है और गीत-संगीत श्‍याम देहाती और आजाद सिंह के हैं। स्‍तरहीनता की सारी हदें तोड़नेवाले इन खुराफाती गीतकारों को न तो समाज का भय है, न देवी का। जानते हैं, माता जी के नाम पर रिलीज इस गीत में कल्‍लू की एक साली का जिक्र किया गया है, जिसका नाम पूनम दूबे है और वो मेला में गुम हो गयी है। उसकी पहचान बताते हुए उसमें कहा गया है कि उसकी सूरत आम्रपाली जैसी है। ना कोई धार्मिक कॉन्‍सेप्‍ट इसमें है, ना ही शब्‍द भक्‍तिवाले हैं। बस हिंदी अंग्रेजी शब्‍दों की एक घटिया तुकबंदी है। यही कारण है कि यहां उसका लिंक देना भी वाजिब नहीं समझा जा रहा है।

जरा गौर कीजिए, इस गीत में जिन दो लोगों के नाम लिये गये हैं, उन नाम की दो महिलायें भोजपुरी इंडस्‍ट्री से जुड़ी हुई हैं। हो सकता है कि उन्‍हें शायद ये गीत सुनकर न भी बुरा लगे, लेकिन देश की बाकी जितनी लड़कियों का पूनम दूबे होगा, उन्‍हें कतई कंफर्टेबल फील नहीं होगा।

सच तो ये है कि सर्वत्र अश्‍लीलता फैलानेवाले इन गीतकारों, गायकों और म्‍यूजिक कंपनियों को न तो समाज की पड़ी है, न किसी की आस्‍था की और न ही विश्‍वास की। इनके खिलाफ सामाजिक संगठनों द्वारा मुकदमा किया जाना चाहिए, क्‍योंकि ये देश के सवा सौ करोड़ लोगों की आस्‍था के साथ खिलवाड़ किया गया है। अलबम पर ‘भुला गइलीं साली’ लिखना निहायत आपत्‍तिजनक है।