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भोजपुरी इंडस्‍ट्री बेहद बुरे दौर से गुजर रही है। पैसे के लेन-देन के मामलों में तो स्‍थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कोई भी अब किसी दूसरे पर यकीन करने को तैयार नहीं है। और जो यकीन कर रहे हैं, वो लुट जा रहे हैं, बर्बाद हो जा रहे हैं। रमेश व्‍यास और डॉ.सुनील के बीच हुए वाकये से तो आप वाकिफ ही हैं। लेकिन वहां डॉ. सुनील दबंग निकले और रमेश व्‍यास को हथकड़ी पहनवा कर अपना पाई-पाई चुकता करवा लिया।

अब उसी तरह का झोलझाल वाला एक नया मामला सामने आया है।

सूत्रों के अनुसार निर्देशक देव पांडेय की खेसारी लाल और काजल राघवानी अभिनीत फिल्‍म ‘नागदेव’ का बिहार और झारखंड वितरण अधिकार पटना के दीपू सिंह ने 51 लाख में निर्माता नीलाभ तिवारी से खरीदा था। लेकिन बाद में उस फिल्‍म को अमित कुकरेजा ने टेक ओवर कर लिया, जो पंजाब के वितरक और फाइनेंसर हैं। पंजाब और मुंबई में ‘नागदेव’ का वितरण कर रहे अमित कुकरेजा ने दीपू सिंह के सामने ये प्रस्‍ताव रखा कि वो उनके साथ बिहार और झारखंड वितरण में फिफ्टी फिफ्टी का पार्टनर बनना चाहते हैं। दीपू सिंह ने उनके इस प्रस्‍ताव को स्‍वीकार कर लिया। दीपू सिंह ने ‘नागदेव’ के लिए बिहार एकाउंट में 11 लाख पहले ही दे दिये थे। बाद में अमित कुकरेजा ने भी 6 लाख रुपये बिहार एकाउंट में जमा करा दिये। दोनों के बीच तय ये हुआ कि ‘आस फिल्‍म्‍स’ के सर्वेसर्वा अमित कुकरेजा और दीपू सिंह मिलकर इसे ‘राजरथ फिल्‍म्‍स’ के माध्‍यम से बिहार और झारखंड में डिस्‍ट्रीब्‍यूट करेंगे।

सूत्रों की मानें तो यहां तक सब कुछ ठीकठाक था। मामला गड़बड़ तब हुआ, जब मुंबई के एक फाइनेंसर ने अमित कुकरेजा से कहा कि वो उनका संपर्क एक ऐसे आदमी से करा सकता है, जो उन्‍हें अच्‍छी रकम दे सकता है। उसी फाइनेंसर के जरिए अमित कुकरेजा का संपर्क ‘आध्‍या फिल्‍म्‍स, पटना’ के रंजीत कुमार से हुआ। सुना है कि अमित कुकरेजा ने रंजीत कुमार से 40 लाख एमजी टर्म्‍स पर ‘नागदेव’ का होल-सोल बना दिया। नतीजा, रंजीत शर्मा ने ‘नागदेव’ का कटिहार क्षेत्र में वितरण अधिकार ‘रमायन फिल्‍म्‍स’ को बेच दिया।

मजे की बात यह कि दीपू सिंह को कानोंकान इन सभी डीलिंग्‍स की भनक तक नहीं लगी। लेकिन जब कटिहार की संस्‍था ने इस डील रजिस्‍ट्रेशन को डाला, तब दीपू सिंह को पता चला कि उनकी फिल्‍म को कटिहार में रमायन फिल्‍म्‍स रिलीज करने जा रही है। जाहिर है, दीपू सिंह के कान खड़े हो गये और उन्‍होंने तुरंत मेल भेजकर अपनी आपत्‍ति दर्ज करा दी और ये भी कहा कि उनके सिवा और कोई बुकिंग नहीं कर सकता, क्‍योंकि कानूनी तौर पर बिहार और झारखंड में फिल्‍म का वितरण अधिकार उनके पास सुरक्षित है।

बहरहाल, मामला जब फंस गया तो अमित कुकरेजा ने दीपू सिंह से संपर्क किया और उनके सामने प्रस्‍ताव रखा कि वो रंजीत के साथ पार्टनर बनकर फिल्‍म रिलीज करें। दीपू सिंह ने अमित कुकरेजा के इस प्रस्‍ताव को ठुकरा दिया। उन्‍होंने साफ-साफ कह दिया कि इन परिस्‍थितियों में अब ये संभव नहीं कि वो इस प्रोजेक्‍टर में पार्टनर बनकर रहेंगे। बेहतर यही होगा कि फिल्‍म रिलीज होने से पहले उनके 11 लाख रुपये उन्‍हें वापस कर दिये जायें। और अगर ऐसा नहीं हुआ तो वो कोर्ट में जाकर फिल्‍म की रिलीज रुकवाने का आदेश लायेंगे। खबर लिखे जाने तक यही पता चला है कि दीपू सिंह को उनके पैसे वापस नहीं मिले हैं और उन्‍होंने कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यानी एक बात तय है कि अब इस फिल्‍म का भी लटकना तय है ‘लोहा पहलवान’ की तरह, अगर दीपू सिंह को उनके पैसे नहीं मिल जाते हैं।

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1 thought on “अमित कुकरेजा ने दीपू सिंह के पैसे नहीं दिये तो अटक जायेगी देव की ‘नागदेव’”

  1. Sanjeev bhuwania says:

    Deepu Singh ke paise Milna bahut jaroori hai Varna film Kisi bhi halat mein release nahi hogi ईट से ईट बजा दिया जाएगा Yeh Mumbai wale kya Sochta hai कि हम बिहार वाले सभी लोग बेवकूफ हैं

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