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यह गीत उसी भोजपुरी फिल्‍म ‘बद्रीनाथ’ का है, जिसका ‘कहा त भुइयां चटाई बिछाईं, ओही प खूब मजा आई हो…’ गीत अभी कुछ दिन पहले रिलीज हुआ था। यानी एक से बढ़कर एक। कहीं खाटी के पाटी बजने की बात तो कहीं चटाई बिछाकर मजा लेने की बात और अब शादी के पहिले परसादी बांटने की बात। अगर इन गीतों को एक क्रम में आप जोड़कर देखें तो यही समझ में आयेगा, जिस महोदय ने इन गीतों को लिखा है, वो जरूर पोर्न से प्रेरणा लेते हैं। यह बात इंडस्‍ट्री के ही एक बड़े नाम ने कही।

धीरू यादव इस फिल्‍म के निर्देंशक हैं, जो अपनी बड़ी-बड़ी बातों के लिए जाने जाते हैं। एक भी फिल्‍म अभी तक आयी नहीं है, लेकिन फेंकने में उस्ताद हैं। अभी जाकर अगर उनसे कोई कहे कि ये गीत वल्‍गर है तो वो तुरंत इसके लिए किसी और को जिम्‍मेदार ठहरा देंगे, जबकि शूटिंग के समय खूब एंजॉय किये थे।

हालांकि इस गीत का पिक्‍चराइजेशन इसके शब्‍दों जितना अश्‍लील नहीं है। यदि शब्‍दों को नजरअंदाज करके इस गीत को सुना जाये तो कानों को इसकी धुन अच्‍छी लगती है। हां इस फिल्‍म के हीरो संजीव मिश्र का जो कद-काठी है, उसके सामने प्रियंका पंडित जरा भी मैच नहीं करती हैं। नृत्‍य निर्देशक ने अगर मेहनत की होती तो ये गीत और अच्‍छा बन पड़ता। संजीव मिश्रा में वो पोटेंशियल नजर आता है, जहां मेहनत कर उनसे और बेहतर काम कराया जा सकता है। हालांकि दूसरी फिल्‍म के हिसाब से धीरू यादव का निर्देशन बहुत बुरा नहीं है।

एक बात तय है कि जब तक मेकर्स के दिमाग से अश्‍लीलता नहीं हटेगी, तब तक इसे कोई नहीं हटा सकता और भोजपुरी की लिए यही सबसे बड़ा दुर्भाग्‍य है कि जो भी यहां आता है, उसे अश्‍लीलता ही कामयाबी की सीढ़ी नजर आती है।

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