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कभी अपने ही बुने हुए जाल में विनय बिहारी फंस चुके हैं। खेसारी लाल ने अच्‍छी तरह उन्‍हें लपेट लिया है और अब विनय बिहारी को कोई जवाब नहीं सूझ रहा है। बस अनाप-शनाप बके जा रहे हैं। यहां हम किसी के पक्ष में बात नहीं कर रहे हैं। बस जो कुछ हुआ है, उसी का विश्‍लेषण करने की कोशिश कर रहे हैं।

दरअसल विनय बिहारी की देखरेख में आठ दस महीने पहले एक कार्यक्रम हुआ था उनके गांव में, जिसमें 10 गरीब लड़कियों की शादी करायी गयी। उसी शादी समारोह में विनय बिहारी ने खेसारी को आमंत्रित किया था। चूंकि खेसारी बिना मोटी रकम लिये कहीं नहीं जाते, सो उन्‍होंने पैसों की डिमांड कर दी और मामला 5 लाख में डन हो गया।

कार्यक्रम वाले दिन खेसारी ने अभी तीन गाने भी नहीं गाये थे कि भीड़ अनियंत्रित हो गयी और वहां तोड़-फोड़ शुरू हो गयी। हालात अचानक इतने बिगड़ गये कि एक व्‍यक्‍ति की जान तक चली गयी और कई लोग घायल हो गये।

उस कार्यक्रम के लिए तय 5 लाख की राशि में से खेसारी को कथित रूप से चार लाख ही मिले थे, इसलिए उनका कहना है कि एक लाख बाकी है। जबकि विनय बिहारी ये सोच रहे थे कि कार्यक्रम हो नहीं पाया, लोग घायल हो गये, उनका इलाज कराना पड़ा, इसलिए खेसारी में इतनी तो आदमियत होगी ही कि बाकी पैसे नहीं मांगेंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। बिहारी भूल गये कि वो खेसारी हैं।

अपने गले में सोने का वजन बढ़ाने के लिए भोजपुरी को गर्त में पहुंचाने वाले खेसारी लाल की करतूत किसी से छुपी नहीं है। गंदे गीत गाकर भोजपुरी इंडस्‍ट्री में आनेवाले खेसारी आज भी घटिया गीत गा-गाकर ही अपना अस्‍तित्‍व बनाये हुए हैं। लेकिन विनय बिहारी ने भी भोजपुरी को जो योगदान दिया है, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सालों पहले विनय बिहारी ने ही लिखा था- ‘मुहंवा पर डाल के चदरिया’, लहरिया लूटा ये राजा’, ‘राजा जी दिलवा मांगेलें गमछा बिछाइ के’, ‘मिसिर जी तू त बाड़ा बड़ा ठंडा’। विनय बिहारी जी माना कि आपने 22 हजार अच्‍छे गीत लिखे हैं, लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं कि पढ़े-लिखे होने के बावजूद आपने जो अश्‍लील गाने लिखने का गुनाह किया है, उसे कोई माफ कर देगा।

कहते हैं, जिसके घर शीशे के होते हैं, वो दूसरों के घर पर पत्‍थर नहीं फेंका करते। विनय बिहारी जी आप भूल रहे हैं कि अश्‍लीलता के बीज कभी आपने ही बोये थे, जो अब पेड़ का रूप ले चुके हैं। उन्‍हीं पेड़ों का फल आज दिनेश लाल निरहुआ, पवन सिंह, खेसारी लाल, कल्‍लू, चिंटू, रितेश समेत असंख्‍य गायक-गायिकाएं खा रहे हैं।

अब आते हैं मुद्दे की बात पर- विनय बिहारी जी, खेसारी तो गंवार है और ये बात वो कहता ही रहता है, इसलिए उससे बकवास करना दीवाल में सर टकराने जैसा है। लेकिन चंद सवाल आपसे जरूर पूछा जाना चाहिए, क्‍योंकि आप पढ़े-लिखे और गीतकार, कलाकार होने के साथ ही कभी मंत्री रहे और आज विधायक भी हैं।

विनय बिहारी जी जब शादी गरीब लड़कियों की थी, तो खेसारी को 5 लाख देकर आपने बुलाया ही क्‍यों? कमाते-खाते लोग तो शादी में इन सभी को बुला ही नहीं पाते, फिर आपने गरीब लड़कियों की शादी में उसे क्‍यों बुलाया? वो भी तब, जब आप शादी चंदा मांग करके कर रहे थे? कितना अच्‍छा होता यदि खेसारी को पांच लाख देने की बजाय उन गरीब दस लड़कियों के नाम 50-50 हजार फिक्‍स्‍ड डिजॉजिट कर दिये होते?

आज आप कह रहे हैं कि खेसारी अश्‍लील गाता है और ऐसे लोगों की ही वजह से भोजपुरी थियेटरों में बहन-बेटियों का आना बंद हो गया। क्‍या आपको इस बात का तब एहसास नहीं था, जब आप धीरे-धीरे गंदगी के बीज बो रहे थे?

क्‍या आप इस बात को मानने के लिए तैयार हैं कि कल्‍पना के गंदे गीत गाने की ही वजह से बिहार उत्‍तर प्रदेश की गायिकाएं निर्लज्‍ज बनीं और आज कितना भी गंदा गीत हो, गाने में उन्‍हें हिचक नहीं लग रही? दुख की बात तो ये है कि आज भी आप कल्‍पना के नाम की माला जपते रहते हैं।

विनय बिहारी जी अभी तो ये शुरूआत है, आगे-आगे देखिए होता है क्‍या?

-एस. एस. मीडिया डेस्‍क 

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